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पास्कल का नियम    --     संतुलन में द्रव का दबाव चारों तरफ बराबर होता है। 

• हुक का नियम        --      प्रत्यास्था सीमा के अन्दर प्रतिबल सदैव विकृति के समानुपाती होता है। 

• आर्कमिडीज का सिध्दांत   --   किसी द्रव में डूबे किसी ठोस पर लगा उत्क्षेप, ठोस द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है। 

• बाँयल का नियम     --    किसी निश्चित तापक्रम पर किसी गैस को दी गई मात्रा का आयतन उसके दाब के व्युत्क्रमानुपाती होता है। 

• न्यूटन के गति के नियमप्रथम नियम  -  कोई वस्तु तब तक अपनी गति अथवा बिरामावस्था में होती है जबतक कि उसपर कोई बाह्य बल न आरोपित किया जाए। 

• द्वितीय नियम   -    संवेग में परिवर्तन की दर आरोपित बल के समानुपाती होती है एबं परिवर्तन उसी दिशा में होता है, जिस दिशा में बल आरोपित किया जाता है अर्थात्‌  F = ma

• तृतीय नियम  --     प्रत्येक क्रिया के विपरीत ओर बराबर प्रतिक्रिया होती है। 

• संवेग संरक्षण के सिद्धांत   --   जब दो या दो से अधिक वस्तुएँ एक-दूसरे के साथ परस्पर क्रिया करती एवं कोई भी बाह्य बल नहीं लग रहा तो उनका कुल संवेग सर्वदा संरक्षित रहता है। उदाहरण - रॉकेट की उड़ान 

• न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम  --   किन्ही दो पिण्डों के बीच कार्य करने वाले बल का परिणाम, पिण्डों के द्र॒व्यमान के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। 

• चार्ल्स का नियम      --     दाब नियत हो तो, गैस का आयतन परम तापक्रम का समानुपाती होता है। 

• गैसों का गतिज सिध्दांत।  --     यदि किसी गैस को घनाकार बर्तन में रखा जाए तो गेसों का दाब गैस के द्वारा उत्पन्न दाब के बराबर होता है, जो गैस द्वारा बर्तन की दीवार की इकाई क्षेत्रफल पर इकाई सेकण्ड में उत्पन्न की जाती है। 

• किरचाँफ का ताप नियम  --    किसी विकिरण के लिए ऊष्मा का अच्छा शोषक उसी विकिरण के लिए ऊष्मा का अच्छा विकिरण भी होता है। उष्मा की इकाई जूल है। 

• कूलाँम का व्युत्क्रम वर्ग नियम   --   समान आवेश परस्पर प्रतिकर्षित व असमान आवेश आकर्षित होते है दो आवेशों के बीच क्रियाशील आकर्षण तथा प्रतिकर्षण का बल उनके गुणनफल के समानुपाती एवं उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। 

• न्यूटन का शीतलन नियम     --    किसी वस्तु के शीतलन की दर उस वस्तु के औसत ताप तथा समीपवर्ती वातावरण के ताप के अन्तर के अनुक्रमानुपाती होती है, जबकि तापमान का अन्तर कम हो। 

• जूल थाँमसन प्रभाव    --     किसी गैस के प्रभाव को किसी दबाव के अन्दर किसी छिद्रयुक्त माध्यम में मुक्त रूप से फैलने दिया जाए तो गैस के तापमान में अन्तर जूल थॉमसन प्रभाव कहलाता है। यह प्रभाव शीतलन में प्रयुक्त होता है। 

• डाँप्लर का नियम   --   यदि ध्वनि स्रोत तथा स्रोता के मध्य सापेक्ष गति हो रही हो तो श्रोता को स्रोत की आवृत्ति बदली हुई प्रतीत होती है। इस घटना को डॉप्लर प्रभाव या डॉप्लर का नियम कहते है। 

• ओम का नियम --   यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थायें अपरिवर्तित रहें तो उसके सिरों पर लगाए गए विभवांतर तथा उसमें प्रवाहित विद्युतधारा की निष्पत्ति नियत रहती है। 

• ऊष्मा गतिकी के नियम 

• प्रथम नियम    --   एक यांत्रिक क्रिया में उत्पन्न ऊष्मा किए गए कार्य के समानुपाती होता है। ऊष्मा गतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण को दर्शाता है। 

• द्वितीय नियम  --   इस नियम के अनुसार उपलब्ध ऊष्मा के सम्पूर्ण भाग को यांत्रिक कार्य में बदलना संभव नहीं है, परन्तु इसके एक निश्चित भाग को कार्य में बदला जा सकता है अर्थात्‌ ऊष्मा अपने आप निम्न ताप की वस्तु से उच्च ताप की वस्तु की ओर प्रवाहित नहीं हो सकती। 

• ऊर्जा संरक्षण के सिध्दांत  --    ऊर्जा का न तो निर्माण होता न विनाश अर्थात कोई भी पिण्ड की कुल ऊर्जा हमेशा नियत होती इसका केवल एक रूप से _दूसरे रूप में रूपान्तरण होता है। 

• बरनौली प्रमेय     --   जब कोई असम्पीड्य और अश्यान द्रव अर्थात आदर्श द्रव किसी नली में धारा रेखीय प्रवाह में बहता है तो उसके मार्ग के प्रत्येक . पर इसके एकांक आयतन या एकांक द्रव्यमान की कल ऊर्जा नियत रहती है। 

• केप्लर का ग्रहीय गति के नियम  --   सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले ग्रहों का पथ दीर्घवृत्तीय या अंडाकार होता है। 

• रदरफोर्ड का नाभिकीय सिध्दांत    --     इस सिद्धांत के अनुसार परमाणु के अंदर का अधिकांश भाग खाली होता तथा परमाणु गोलीय होता हैं और नाभिक का आकार परमाणु के आकार की तुलना में अत्यंत छोटा होता है। 

• दाब का नियम  --   स्थिर आयतन पर किसी गैस  के निश्चित द्रव्यमान का दाब उसके परम ताप का अनुक्रमानुपाती होता अर्थात्‌ स्थिर आयतन पर यदि किसी गैस का ताप बढाया जाए, तो दाब बढ़ता है और यदि ताप घटाया जाए, तो दाब घटता है। 

• मैंडलीफ का आवर्त नियम   --    यदि तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु भारों के क्रम में सजाया जाए तो उनकी एक निश्चित संख्या के बाद लगभग समान गुण वाले तत्व पाये जायेगे। 

• आधुनिक आवर्त नियम   --   तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनकी परमाणु संख्या के आवर्त फलन होते ।
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