MPGK सुपर नोट्स – भू-वैज्ञानिक संरचना

Tez Education By Tez Education February 5, 2026

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मध्य प्रदेश की भूवैज्ञानिक संरचना

मध्य प्रदेश: भूवैज्ञानिक संरचना

“भारत का हृदय स्थल” – प्राचीन गोंडवाना लैण्ड का अभिन्न अंग और भूगर्भीय विविधता का संगम।

सामान्य परिचय

मध्य प्रदेश की भू-आकृति एवं उसकी भूगर्भीय संरचना का निर्माण विभिन्न कल्पों की जटिल प्रक्रियाओं का परिणाम है। यहाँ की चट्टानें न केवल भौगोलिक पहचान देती हैं, बल्कि यहाँ की मिट्टी और खनिज संसाधनों की आधारशिला भी हैं।

गोंडवाना लैंड

एमपी दुनिया के सबसे पुराने भू-भागों में से एक का हिस्सा है।

खनिज संपदा

चट्टानों की विशिष्टता के कारण ही यहाँ हीरा, तांबा और कोयला प्रचुर मात्रा में है।

शैल समूहों का क्रम

1

आर्कियन शैल

सबसे प्राचीन आधारभूत चट्टानें

2

धारवाड़ शैल

मैंगनीज और ताँबा के लिए प्रसिद्ध

3

पुराना संघ

कुड़प्पा और विंध्यन क्रम

4

आर्य समूह

गोंडवाना और दक्कन ट्रैप

खनिज एवं क्षेत्र वितरण

क्षेत्र / श्रेणी चट्टान का प्रकार खनिज / विशेषता
ग्वालियर श्रेणी कुड़प्पा लौह अयस्क / स्लेट
बिजावर श्रेणी कुड़प्पा क्रम हीरा
गोंडवाना क्षेत्र आर्य समूह कोयला
दक्कन ट्रैप क्रिटेशियस कल्प काली मिट्टी
धारवाड़ चट्टान धारवाड़ मैंगनीज, ताँबा

खनिज महत्व विज़ुअलाइज़ेशन

विभिन्न शैल समूहों का आर्थिक महत्व (सांकेतिक ग्राफ)

प्रमुख उद्योग

खनन एवं सीमेंट

प्रमुख मिट्टी

काली मिट्टी (कपास हेतु)

मध्य प्रदेश का भूवैज्ञानिक रेखाचित्र

दक्कन ट्रैप (मालवा) विंध्यन श्रेणी गोंडवाना बिजावर * यह एक सांकेतिक भौगोलिक चित्रण है
काली मिट्टी
कोयला क्षेत्र
हीरा क्षेत्र
पर्वत श्रेणी

पन्ना की हीरा खदानें लोड हो रही हैं…

पन्ना की हीरा खदान

भेड़ाघाट की संगमरमर चट्टानें लोड हो रही हैं…

नर्मदा घाटी की संगमरमर की चट्टानें
मध्यप्रदेश की भूगर्भीक संरचना | Long Page Guide
🗺️

म.प्र. भूगर्भीक संरचना

मध्यप्रदेश का भूवैज्ञानिक परिचय

मध्यप्रदेश की भूमि ‘गोंडवाना लैंड’ का एक अभिन्न हिस्सा है। यहाँ की भूगर्भीक संरचना करोड़ों वर्षों के विकास का परिणाम है। नीचे विस्तार से प्रत्येक शैल समूह का अन्वेषण करें।

📍 जिला खोजें

शैल समूहों का महत्व तुलना

कालानुक्रमिक विकास (Timeline)

आर्कियन (Archaean)

पृथ्वी की प्राचीनतम चट्टानें।

धारवाड (Dharwar)

धात्विक खनिजों से भरपूर।

कुड़प्पा (Cuddapah)

हीरा उत्पादन क्षेत्र।

विंध्यन (Vindhyan)

भवन निर्माण सामग्री।


🌋

1. आर्कियन शैल समूह

मुख्य विवरण

ये चट्टानें मैग्मा और लावा के ठंडे होने से बनी हैं। ये पृथ्वी की **पैतृक चट्टानें** हैं और मध्यप्रदेश के उत्तर-पूर्वी भागों में पाई जाती हैं।

बुंदेलखण्ड नीस

बड़े आकार के कण

चार्नोकाइट नीस

सूक्ष्म कण (नीलगिरी नीस)

संरचना विश्लेषण

⛏️

2. धारवाड शैल समूह

आर्कियन चट्टानों के अपरदन से निर्मित, यह म.प्र. का सबसे समृद्ध खनिज क्षेत्र है।

सौंसर क्रम

छिंदवाड़ा क्षेत्र – अभ्रक व मैगनीज

सकोली क्रम

जबलपुर क्षेत्र

चिल्पी क्रम

बालाघाट – स्लेट व फाइलाइट

नोट: मलाजखण्ड के प्रसिद्ध तांबे के भंडार इसी समूह के ‘क्लोजपेट क्रम’ का हिस्सा हैं।

खनिज उपलब्धता

💎

3. कुड़प्पा क्रम

💎

बिजावर उपक्रम

पन्ना और छतरपुर जिलों में विस्तृत। यह क्षेत्र दुनिया भर में **हीरे के निक्षेप** के लिए जाना जाता है।

निचला कुड़प्पा
⛰️

ग्वालियर उपक्रम

अरावली समूह का हिस्सा। यहाँ की ऊपरी चट्टानें ‘मोरार’ और निचली चट्टानें ‘पार’ कहलाती हैं।

शैल व जेस्पर समृद्ध
🏗️

4. विंध्यन क्रम

विंध्य पर्वत श्रृंखला के नाम पर आधारित, यह समूह लगभग 4200 मीटर मोटा है। यहाँ से प्राप्त बलुआ और चूना पत्थर ऐतिहासिक इमारतों के निर्माण में उपयोग हुआ है।

विंध्यन शैल समूह
लोअर विंध्यन
सेमरी उपक्रम
नर्मदा-सोन घाटी क्षेत्र
अपर विंध्यन
कैमूर
सतना, रीवा
रीवा
पन्ना-झिरी शैल
भाण्डेर
शिरबू शैल

🧠 ज्ञान की परीक्षा

देखें कि आपने कितना सीखा!

1. मध्यप्रदेश के किस शैल समूह में ‘हीरे’ पाए जाते हैं?

2. किस जिले में ‘सौंसर क्रम’ की चट्टानें पाई जाती हैं?

मध्यप्रदेश की भूगर्भीक संरचना | इंटरैक्टिव स्टडी गाइड

© 2025 MP Geological Resource Center

मध्य प्रदेश की भूगर्भीय संरचना

मध्य प्रदेश की भूगर्भीय संरचना

आर्य समूह से दक्कन ट्रैप तक का सफर

कालखंड कार्बोनीफेरस – प्लीस्टोसीन

आर्य एवं गोंडवाना शैल समूह

खनिज संपदा

मध्य प्रदेश का 99% कोयला इसी समूह से प्राप्त होता है।

मुख्य विस्तार

सतपुड़ा श्रेणी, बघेलखण्ड का पठार, और सीधी से रायगढ़ तक विस्तृत।

विशेषता

जीवाश्म युक्त और परतदार चट्टानें, जो कार्बनिक अवसादीकरण से निर्मित हैं।

गोंडवाना शैल समूह का विभाजन
क्रम उपक्रम / स्तर विस्तार एवं विशेषता
1. लोअर गोंडवाना तलचर, बरकार, कहरवारी सोन व महानदी घाटी; सिंगरौली, शहडोल। नोट: पेंच घाटी बरकार स्तर में।
2. मध्य गोंडवाना पचमढ़ी, देनवा, बागारा, टिकी सतपुड़ा और बघेलखंड (परसारा)। जीवाश्म के आधार पर विभाजन।
3. अपर गोंडवाना जबलपुर एवं महादेव उपक्रम जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम। बालू पत्थर व शैल की प्रधानता।

दक्कन ट्रैप (क्रिटेशियस काल)

इसका निर्माण **मैग्मा के बेसाल्ट लावा** के जमाव से हुआ है। यह मुख्यतः मध्य प्रदेश के दक्षिण-पश्चिमी भाग (मालवा) में विस्तृत है।

बेसाल्ट चट्टानें काली मिट्टी जियोलाइट
03
मुख्य विभाजन
बेसाल्ट
प्रमुख शैल
मालवा
सर्वाधिक विस्तार

01 निचला ट्रैप

नर्मदा घाटी क्षेत्र में विस्तृत। इसके नीचे बाघ व लमेटा स्तर पाए जाते हैं।

02 मध्यवर्ती ट्रैप

मालवा व मध्य भारत में विस्तृत। यह परत पूर्णतः जीवाश्म विहीन होती है।

03 ऊपरी ट्रैप

मालवा और दक्षिणी MP में। इसमें जीवाश्म और राख की परतें मिलती हैं।

तृतीय व चतुर्थ समूह

हिमालय के निर्माण के दौरान नदियों द्वारा लाए गए अवसादों से नवीन जलोढ़ के रूप में इस समूह का विकास हुआ है।

क्या आपको पता है?

  • ट्रैप का अर्थ: स्वीडिश भाषा में इसका अर्थ ‘सोपान’ या सीढ़ीनुमा भाग होता है।
  • बेसाल्ट चट्टानों के टूटने (अपक्षय) से ही उपजाऊ काली मिट्टी का निर्माण होता है।

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