MPGK सुपर नोट्स – मध्यप्रदेश में सिंचाई
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मध्य प्रदेश में सिंचाई
फसलों के समुचित विकास और कृषि समृद्धि का आधार
सामान्य परिचय
फसलों के समुचित विकास हेतु जल एक अपरिहार्य तत्व है। जब पर्याप्त मात्रा में वर्षा तथा कृषि भूमि की नमी में कमी आ जाती है, तब कृत्रिम रूप से खेतों को जल प्रदान किया जाता है, जिसे सिंचाई (Irrigation) कहते हैं।
“मानसून की अनिश्चितता और भौगोलिक बनावट के कारण प्रदेश में सिंचाई की अलग-अलग आवश्यकता पड़ती है।”
वर्तमान क्षमता
45 लाख हे.
लक्ष्य 2025
65 लाख हे.
बजट 2024-25
₹13,596 Cr
रामसर साइट्स
05 स्थल
सिंचाई परियोजनाओं का वर्गीकरण
वृहद परियोजनाएँ
10,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र
नहर एवं बहुउद्देश्यीय परियोजनाएँ
मध्यम परियोजनाएँ
2000 – 10,000 हेक्टेयर
छोटी नहरें
लघु परियोजनाएँ
2000 हेक्टेयर से कम
कुएँ, नलकूप, ड्रिप सिंचाई
विकास की समयरेखा (History)
बालाघाट में वेनगंगा नहर का निर्माण।
मुरैना जिले में ‘पगारा बाँध’ का निर्माण।
पालकमती (रायसेन) और मुरम नाला (बालाघाट) टैंकों का विकास।
सिंचाई के मुख्य स्रोत
सर्वाधिक कुएँ
मंदसौर
सर्वाधिक नलकूप
इंदौर
प्रमुख नहरें और उनकी विशेषताएँ
वेनगंगा नहर
बालाघाट | 1923
35 कि.मी. लंबी, मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र के बीच साझा। 4000 हेक्टेयर भूमि सिंचित।
तवा नहर
नर्मदापुरम | तवा-देनवा संगम
197 कि.मी. लंबी 2 नहरें, 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को जीवनदान देती हैं।
चंबल नहर
श्योपुर | उत्तर-पश्चिम क्षेत्र
तीन मुख्य शाखाएँ: अम्बाह (179km), मुरैना (56km), और मऊ (172km)।
भांडेर नहर
MP-UP सीमा | परीक्षा बाँध
58 कि.मी. लंबाई, 44,534 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता। लहार नहर इसी का हिस्सा है।
हलाली नहर
विदिशा | 1968
23.43 कि.मी. लंबी, विदिशा और रायसेन जिलों को लाभान्वित करती है।
बारना नहर
रायसेन | पलकमती के पास
रायसेन क्षेत्र में कृषि विकास का मुख्य स्रोत।
रामसर साइट्स (Ramsar Sites)
- 1 भोज वेटलैंड (2002) – भोपाल
- 2 साख्यं सागर झील (2022) – शिवपुरी
- 3 सिरपुर तालाब (2022) – इंदौर
- 4 यशवंत सागर झील (2024) – इंदौर
- 5 तवा जलाशय (2024) – नर्मदापुरम
💡 रोचक तथ्य
🔹 झील नगरी: भोपाल को झीलों की नगरी (Lake City) कहा जाता है।
🔹 52 तालाब: जबलपुर को ’52 तालाबों का शहर’ कहते हैं।
🔹 मालवा-ए-कश्मीर: नरसिंहगढ़ (राजगढ़) स्थित ‘चिड़ी-खो’ को कहा जाता है।
🔹 भोजताल: यह मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी झील है।