MPGK सुपर नोट्स – मध्यप्रदेश के ऊर्जा संसाधन
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मध्य प्रदेश के ऊर्जा संसाधन
ऊर्जा: कार्य करने की क्षमता – प्रदेश के विकास का आधार
सामान्य परिचय एवं ऐतिहासिक सफर
मध्य प्रदेश में ऊर्जा का उपयोग मुख्य रूप से विद्युत के रूप में होता है। राज्य का ऊर्जा सफर 1905 में ग्वालियर से शुरू हुआ था, जहाँ प्रथम स्टीम टर्बाइन स्थापित किया गया था।
महत्वपूर्ण मील के पत्थर:
- 1905: प्रथम 240 KW स्टीम टर्बाइन (ग्वालियर)
- 1948: विद्युत प्रदाय अधिनियम लागू (10 सितम्बर)
- 1950: म.प्र. विद्युत मंडल की स्थापना (जबलपुर)
- 1982: म.प्र. ऊर्जा विकास निगम की स्थापना
- 1998: राज्य विद्युत नियामक आयोग का गठन
विद्युत वितरण ढांचा (DISCOMs)
जबलपुर मुख्यालय
जबलपुर, शहडोल, रीवा, सागर संभाग
भोपाल मुख्यालय
भोपाल, ग्वालियर, चम्बल, नर्मदापुरम
इंदौर मुख्यालय
इंदौर, उज्जैन संभाग
अनवीकरणीय ऊर्जा: ताप विद्युत केंद्र
कोयला आधारित| केंद्र का नाम | स्थान | स्थापना | क्षमता (MW) | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|---|
| चाँदनी ताप विद्युत | नेपानगर (बुरहानपुर) | 1953 | 177 | प्रदेश का प्रथम केंद्र; नेपानगर कागज मिल को आपूर्ति। |
| विंध्याचल ताप विद्युत | बैढ़न (सिंगरौली) | 1987 | 4760 | सर्वाधिक क्षमता; USSR के सहयोग से; भारत का सबसे बड़ा संयंत्र। |
| सतपुड़ा ताप विद्युत | सारणी (बैतूल) | 1967 | 1330 | म.प्र. और राजस्थान की 3:2 साझेदारी। |
| श्री सिंगाजी विद्युत | डोंगलिया (खंडवा) | 2014 | 2520 | BHEL और L&T द्वारा इकाइयां संचालित। |
| खरगोन ताप विद्युत | सेल्दा (खरगोन) | 2019 | 1320 | भारत का पहला अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल प्लांट। |
⚡ सासन प्रोजेक्ट
रिलायंस पावर द्वारा सिंगरौली में स्थापित 3960 MW का अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट।
☢️ परमाणु ऊर्जा (प्रस्तावित)
चुटका (मण्डला) और भीमपुर (शिवपुरी) में कुल 4200 MW क्षमता की योजना।
📊 खपत डेटा
कृषि में सर्वाधिक 40% बिजली खपत होती है, उसके बाद घरेलू उपयोग (26%) का स्थान है।
नवीकरणीय ऊर्जा: हरित भविष्य की ओर
सौर ऊर्जा (Solar Energy)
मध्य प्रदेश 61,660 MW सौर क्षमता के साथ भारत में 4th स्थान रखता है। 2030 तक 20,000 MW का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
रीवा सोलर पार्क
750 MW क्षमता; हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में केस स्टडी के रूप में शामिल।
ओंकारेश्वर फ्लोटिंग प्लांट
600 MW क्षमता; दुनिया का सबसे बड़ा तैरता हुआ सोलर प्लांट।
साँची सोलर सिटी
8 MW क्षमता के साथ शासकीय व व्यावसायिक भवनों को सोलर से जोड़ना।
कस्तूरबा ग्राम (इंदौर)
देश का प्रथम सौर ऊर्जा संयंत्र यहीं स्थापित किया गया था।
“क्या आप जानते हैं?”
खरगोन के चेतन सिंह सोलंकी को ‘सोलर मैन ऑफ इंडिया’ कहा जाता है। वे सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता के लिए प्रसिद्ध हैं।
प्रति व्यक्ति उपलब्धता
2,267 KW/h
बायोमास एवं पवन ऊर्जा
- 🍃 कसाई गाँव (बैतूल): भारत का पहला बायोमास गाँव।
- 🌬️ जामगोदरानी (देवास): म.प्र. का प्रथम पवन ऊर्जा संयंत्र (1995)।
- 🐘 इंदौर (देवगुराड़िया): एशिया का सबसे बड़ा बायो-मिथेनाइजेशन वेस्ट प्लांट।
सरकारी प्रयास एवं जनहितकारी योजनाएं
इंदिरा गृह ज्योति
BPL धारकों को 100 यूनिट बिजली केवल 100 रुपये में उपलब्ध कराना।
सौभाग्य योजना
सभी घरों को मात्र 500 रुपये में विद्युत कनेक्शन प्रदान करना।
अटल कृषि ज्योति
कृषि पंपों के कनेक्शन के लिए किसानों को भारी सब्सिडी देना।
RDSS योजना
विद्युत वितरण घाटे (Line Loss) को कम करने और ढांचा सुधारने की योजना।
नवीकरणीय ऊर्जा नीति – 2022 के प्रमुख लक्ष्य
₹60,000 Cr
2027 तक कुल निवेश का लक्ष्य
50,000+
2030 तक नए रोजगार सृजन
100%
विरासत शहरों को ग्रीन सिटी बनाना
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश पारंपरिक कोयला आधारित ऊर्जा से नवीकरणीय (हरित) ऊर्जा की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। विंध्याचल जैसे विशाल थर्मल प्लांट से लेकर रीवा और ओंकारेश्वर जैसे आधुनिक सोलर प्रोजेक्ट्स तक, प्रदेश न केवल आत्मनिर्भर बन रहा है बल्कि दिल्ली मेट्रो जैसे बाहरी संस्थानों को भी बिजली निर्यात कर रहा है।