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म.प्र. शिक्षक पात्रता परीक्षा वर्ग-3 स्पेशल
वर्ष 2022 में आयोजित कुल पेपर संख्या-40
विषय:- भाषा-1 हिन्दी एवं शिक्षण शास्त्र
कुल प्रश्न संख्या-30
पेपर नं.-24/40
Exam Date:- Varg 3 Hindi 16-3-2022 Shift-2.docx
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भाग 1: गद्यांश पर आधारित प्रश्न
निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं. 31 से 38) के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-
“सृष्टि के प्रत्येक कार्यकलाप को अनुशासित तथा सुष्ठु रूप में गतिशील देखकर उसके नियन्ता को जानने की अभिलाषा मनुष्य में आदिकाल से रही है। वैदिक ऋषियों ने उसके रूप-निर्माण का भरसक प्रयत्न किया, किन्तु हताश होकर वे “नेति-नेति” हुए। प्राचीन आर्य दो दलों में बंट गये। उनमें से एक दल तर्क और युक्ति से ब्रह्मा के रूप-निर्धारण का प्रयत्न करता रहा और दूसरे दल ने उसके रूप-निर्माण में तर्क और बुद्धि की पराजय को घोषित किया। इसी दूसरे दल के मनीषियों ने यह अनुभव किया कि मन केवल ‘उसको’ जानने की जिज्ञासा से सन्तुष्ट नहीं है, बल्कि वह अधिकाधिक उस ओर आकर्षित होता जा रहा है, जहाँ व्यक्ति उसके आलिंगन में स्वयं सम्पूर्ण विश्व को कुछ समय के लिए ऐसे भूल जाता है, मानो कोई पुरुष अपनी प्रिया के आलिंगन में स्वयं को और विश्व को भूल जाता हो। रहस्य-भावना के उद्गम के विषय में यह उक्ति संगत ही है।”
भाग 2: पद्यांश पर आधारित प्रश्न
निर्देश: काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं. 39 से 43) के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए-
“देखो रे, शिशिर का हुआ अन्त।
अब धरती पर आया वसन्त।
मन्द-मन्द हवा चली,
गांव-गांव, गली-गली,
बगियन में, कुंजन में,
डाल-डाल कली खिली।
बिहंसा धरती का आदि-अन्त।
अब धरती पर आया वसन्त।
कोयल है कूक रही,
तितली है हुलस रही,
भौरों का गीत सुन,
कुमुदिनी बिहंस रही।
हर्षित वन-उपवन दिग-दिगन्त।
अब धरती पर आया वसन्त।
सर्वत्र बिछी हरियाली है,
हर जन के मुख पर लाली है,
अब धरती-अम्बर की छटा देख,
खुशहाली ही खुशहाली है।
छितराया है वैभव अनन्त।
अब धरती पर आया वसन्त।”
अब धरती पर आया वसन्त।
मन्द-मन्द हवा चली,
गांव-गांव, गली-गली,
बगियन में, कुंजन में,
डाल-डाल कली खिली।
बिहंसा धरती का आदि-अन्त।
अब धरती पर आया वसन्त।
कोयल है कूक रही,
तितली है हुलस रही,
भौरों का गीत सुन,
कुमुदिनी बिहंस रही।
हर्षित वन-उपवन दिग-दिगन्त।
अब धरती पर आया वसन्त।
सर्वत्र बिछी हरियाली है,
हर जन के मुख पर लाली है,
अब धरती-अम्बर की छटा देख,
खुशहाली ही खुशहाली है।
छितराया है वैभव अनन्त।
अब धरती पर आया वसन्त।”
भाग 3: व्याकरण एवं हिंदी शिक्षण शास्त्र (Pedagogy)