MPGK सुपर नोट्स – मध्यप्रदेश का पुनर्गठन
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मध्य प्रदेश का पुनर्गठन (1950-1956)
रियासतों के विलीनीकरण से लेकर आधुनिक राज्य के निर्माण तक की यात्रा
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1947 में भारत की स्वतंत्रता से लेकर 1956 तक, मध्य प्रदेश का स्वरूप आज जैसा नहीं था। यह एक संक्रमण काल था जब 562 रियासतों को एक सूत्र में पिरोया जा रहा था। इस इंटरैक्टिव अनुभव के माध्यम से जानें कि कैसे सरदार पटेल के प्रयासों और विभिन्न प्रशासनिक निर्णयों ने भारत के हृदय प्रदेश को आकार दिया।
चरण 1 भारतीय रियासतों का एकीकरण
स्वतंत्रता के समय भारत 562 रियासतों में बंटा था। तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल और सचिव वी. पी. मेनन के नेतृत्व में एकीकरण का विशाल कार्य संपन्न हुआ।
रियासतों के विलय की स्थिति
चार्ट के खण्डों पर क्लिक या होवर करें
3 विशेष मामले
ज्यादातर रियासतें स्वेच्छा से शामिल हुईं, लेकिन तीन ने शुरुआत में अलग रहने का फैसला किया। नीचे दिए गए बटनों पर क्लिक करके जानें कि उनका विलय कैसे हुआ:
चरण 2 मध्य प्रदेश की संरचना (1950 – 1956)
1956 से पहले, वर्तमान मध्य प्रदेश चार अलग-अलग भागों (Parts) में विभाजित था। नीचे दिए गए नक्शे के ब्लॉकों पर क्लिक करें और जानें कि प्रत्येक भाग की राजधानी और विशेषताएँ क्या थीं।
मध्य भारत का योजनाबद्ध मानचित्र (1950-56)
मानचित्र पर किसी भाग (Part) को चुनें
राजधानी
विवरण
शामिल क्षेत्र
चरण 3 1956 का पुनर्गठन
राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली आयोग) की अनुशंसा पर 1 नवंबर 1956 को भाषाई आधार पर सीमाओं में भारी बदलाव किए गए। नीचे देखें कि किस भाग में क्या परिवर्तन हुआ।
पार्ट – A (नागपुर)
नागपुर सहित विदर्भ क्षेत्र के 8 मराठी भाषी जिले बॉम्बे राज्य (अब महाराष्ट्र) को सौंप दिए गए।
पार्ट – B (मध्य भारत)
राजस्थान के सिरोंज को विदिशा जिले में शामिल किया गया।
मंदसौर की सुनील टप्पा तहसील राजस्थान को दे दी गई।
पार्ट – C (विन्ध्य & भोपाल)
पूरा विन्ध्य प्रदेश और भोपाल राज्य नए मध्य प्रदेश का हिस्सा बन गए। इसमें कोई भौगोलिक कटौती नहीं की गई।
नई राजधानी
भोपाल
पहले केवल एक तहसील थी
1956 में पुनर्गठित मध्य प्रदेश की राजधानी घोषित।
भारत (1950-56)
मध्य प्रदेश पुनर्गठन की स्थिति
संपूर्ण भारत को एकीकृत करने के पश्चात् राज्यों को प्रशासनिक आधार पर 4 भागों (29 राज्य) में विभाजित किया गया था।
राज्यों का वितरण (कुल 29)
भाग A (Part A)
9 राज्य- शासन: गवर्नर का शासन
- MP का संबंध: पूर्वी मध्य प्रदेश (CP & बरार)
भाग B (Part B)
9 राज्य- शासन: विधानमंडल + शाही शासन
- MP का संबंध: मध्यभारत
भाग C (Part C)
10 राज्य- शासन: ब्रिटिश भारत के आयुक्त
- MP का संबंध: विंध्यप्रदेश तथा भोपाल
भाग D (Part D)
1 राज्य- शासन: केन्द्रीकृत शासन
- राज्य: अंडमान और निकोबार
- MP का संबंध: कोई नहीं
पूर्व MP / CP & बरार (भाग-A)
11 दिसंबर 1853
नागपुर का विलय
02 नवंबर 1861
CP की स्थापना
24 अक्टूबर 1936
CP & बरार
मुख्य तथ्य
-
प्रमुख क्षेत्र छत्तीसगढ़, विदर्भ, महाकौशल (कुल 15 रियासतें)
-
राजधानी नागपुर
-
मुख्यमंत्री (1956 तक) पं. रविशंकर शुक्ल
-
विशेष नोट एकमात्र रियासत जो वर्तमान MP में है: मकड़ाई (हरदा)
मध्यभारत (Madhya Bharat)
उद्घाटन: 28 मई 1948 (पंडित नेहरू द्वारा)
इंदौर (ग्रीष्मकालीन)
अवधि: 5½ माह
ग्वालियर (शीतकालीन)
अवधि: 6½ माह
नेतृत्व एवं प्रशासन
विंध्यप्रदेश (Part C)
बुंदेलखंड + बघेलखण्ड (38 रियासतें)
गठन प्रक्रिया
- 04 अप्रैल 1948: गठन (उद्घाटन: N.V. गाडगिल)
- जुलाई 1948: दोनों सरकारों (बुंदेलखंड/बघेलखण्ड) का एकीकरण।
- नोट: प्रारंभ में B श्रेणी, बाद में C श्रेणी का दर्जा।
- विलय: 01 नवंबर 1956
प्रमुख व्यक्तित्व
मार्तंड सिंह (रीवा के राजा)
प्रथम राजप्रमुख
अवधेश प्रताप सिंह
बघेलखण्ड मंत्रिमंडल प्रमुख / एकीकृत मुख्यमंत्री
कामता प्रसाद सक्सेना
बुंदेलखंड मंत्रिमंडल प्रमुख
पंडित शंभुनाथ शुक्ल
1952 चुनाव के बाद मुख्यमंत्री
भोपाल राज्य
इतिहास, विलय और प्रशासनिक संरचना
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
परमार वंश
राजा भोज (1010-1055 ई.)
भोपाल की मूल स्थापना राजा भोज द्वारा की गई थी। प्राचीन नाम भोजपाल था।
आधुनिक स्थापना
दोस्त मोहम्मद खान (1723-24)
अफगानी शासक दोस्त मोहम्मद खान ने भोपाल को आधुनिक रूप से बसाया।
भारतीय विलय
01 जून 1949
नवाब हमीदुल्ला खाँ ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर भोपाल को ‘भारतीय संघ’ का हिस्सा बनाया।
भोपाल: प्रशासनिक संरचना (1952)
मुख्यमंत्री
शंकरदयाल शर्मा
विधानसभा अध्यक्ष
सुल्तान मो. खाँ
उपाध्यक्ष
लक्ष्मीनारायण अग्रवाल
कमिश्नर
N.B. बनर्जी
1950 की स्थिति
1950 में भारतीय संघ के राज्यों को 4 श्रेणियों में बांटा गया था। कुल संख्या 29 थी।
पुनर्गठन आयोग और समितियां
एस.के. धर आयोग
जून 1948- अध्यक्ष: श्यामकृष्ण धर
- सिफारिश: भाषा नहीं, प्रशासनिक आधार होना चाहिए।
- परिणाम: भारी जन असंतोष फैला।
JVP समिति
दिसंबर 1948जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल, पट्टाभिसीतारमैया
निष्कर्ष: भाषायी आधार अस्वीकार।
विरोध:
पोट्टि श्रीरामुलु का 56 दिन की हड़ताल के बाद निधन।
फजल अली आयोग
दिसंबर 1953सदस्य: K.M. पणिक्कर, हृदयनाथ कुंजरू
‘एक राज्य – एक भाषा’ अस्वीकार।
भाषा और प्रशासनिक सुविधा दोनों आधार।
अनुशंसा: 16 राज्य + 3 केंद्रशासित प्रदेश
परिणाम: राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956
7वाँ संविधान संसोधन अधिनियम 1956 पारित किया गया। भाग A, B, C, D की व्यवस्था समाप्त की गई।
MPPSC विशेष
“7वें संविधान संसोधन अधिनियम 1956 द्वारा संविधान का भाग – 7 भी निरसित (Repealed) किया गया।”
मध्य प्रदेश का गठन इसी अधिनियम के तहत हुआ।
मध्यप्रदेश का पुनर्गठन
1 नवंबर 1956: हृदय प्रदेश का उदय
पार्ट A में परिवर्तन
मराठी भाषी 8 जिलों को तत्कालीन बंबई राज्य में मिलाया गया।
- बुल्ढ़ाना
- यवतमाल
- वर्धा
- चांदा
- अंकोला
- भंडारा
- अमरावती
- नागपुर
पार्ट B में परिवर्तन
गया राजस्थान में
मंदसौर की भानपुरा तहसील का ‘सुनेल टप्पा’
आया मध्यप्रदेश में
कोटा (राजस्थान) की ‘सिरोंज’ तहसील विदिशा में
पार्ट C (भोपाल व विंध्य)
कोई परिवर्तन नहीं
यथावत रखा गया
पं. नेहरू के सुझाव पर ‘मध्यप्रदेश’ नामकरण हुआ।
तुलनात्मक विश्लेषण (1956 बनाम वर्तमान)
भौगोलिक एवं प्रशासनिक स्थिति
जिले (1956)
43
जिले (वर्तमान)
55
संभाग (1956)
08
संभाग (वर्तमान)
10
विस्तार एवं लंबाई
अविभाजित मध्यप्रदेश
अक्षांश: $17^\circ 46′ – 26^\circ 30’$
देशांतर: $74^\circ 3′ – 84^\circ 5’$
वर्तमान मध्यप्रदेश
अक्षांश: $21^\circ 6′ – 26^\circ 36’$
देशांतर: $74^\circ 9′ – 82^\circ 48’$
महत्वपूर्ण तथ्य: 31 अक्टूबर 2000 को छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद मध्यप्रदेश का क्षेत्रफल और स्वरूप वर्तमान स्थिति में आया।
मध्यप्रदेश का आंतरिक पुनर्गठन
1971 से 1998 तक की ऐतिहासिक विकास यात्रा
प्रारंभिक पुनर्गठन चरण
होशंगाबाद संभाग
प्रदेश का 10वाँ संभाग बनाया गया।
भोपाल व राजनांदगाँव
- 📍 भोपाल: सीहोर से अलग होकर 44वाँ जिला बना।
- 📍 राजनांदगाँव: दुर्ग से अलग होकर 45वाँ जिला बना।
संभागों का विस्तार
दो नये संभाग: चंबल और बस्तर।
जिला गठन हेतु प्रमुख समितियाँ
| समिति | गठन व रिपोर्ट | नए जिले |
|---|---|---|
| बी. आर. दबे समिति | गठन 1982 | रिपोर्ट 1998 | 10 जिले |
| सिंहदेव समिति | गठन 1998 | रिपोर्ट 1998 | 06 जिले |
| बोस समिति | गठन 2003 | रिपोर्ट 2003 | 03 जिले |
1998: जिलों का व्यापक विस्तार
स्वर्णिम वर्षबी. आर. दबे समिति
25 मई 199810 में से 4 जिले वर्तमान मध्यप्रदेश में हैं:
सिंहदेव समिति
जून 19986 में से 3 जिले वर्तमान मध्यप्रदेश में हैं:
1998 के अंत में प्रदेश की स्थिति
“इस प्रकार निरंतर पुनर्गठन के माध्यम से मध्यप्रदेश ने प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की ओर कदम बढ़ाए, जिससे 1998 तक जिलों की कुल संख्या 61 हो गई।”
मध्यप्रदेश पुनर्गठन यात्रा
1 नवंबर 2000 से वर्तमान तक का प्रशासनिक सफर
2000 का ऐतिहासिक विभाजन
संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत मध्यप्रदेश के 30.47% भू-भाग को अलग करके 01 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ बनाया गया।
सीटों का विभाजन (84वाँ संशोधन)
* 2026 तक ये सीटें यथावत रहेंगी।
| विवरण | मध्यप्रदेश | छत्तीसगढ़ |
|---|---|---|
| कुल जिले (विभाजन के समय) | 45 | 16 |
| प्रथम मुख्यमंत्री | श्री दिग्विजय सिंह | श्री अजीत जोगी |
| प्रथम राज्यपाल | डॉ. भाई महावीर | दिनेश नंदन सहाय |
वर्तमान तक का सफर (2003-2023)
अलीराजपुर (49वां): झाबुआ से (17 मई)
सिंगरौली (50वां): सीधी से (24 मई)
शहडोल संभाग: 10वां संभाग बना (14 जून)
शाजापुर से | 2013
टीकमगढ़ से | 2018
वर्ष 2023: तीन नवीन जिले
53वां जिला: मऊगंज
रीवा से पृथक (13 अगस्त 2023)
54वां जिला: पांढुर्णा
छिंदवाड़ा से पृथक (05 अक्टूबर 2023)
55वां जिला: मैहर
सतना से पृथक (05 अक्टूबर 2023)
नवीन जिलों का सारांश तालिका
| क्रम | जिला | पृथक हुआ | तिथि |
|---|---|---|---|
| 49वां | अलीराजपुर | झाबुआ | 17 मई 2008 |
| 50वां | सिंगरौली | सीधी | 24 मई 2008 |
| 51वां | आगर-मालवा | शाजापुर | 16 अगस्त 2013 |
| 52वां | निवाड़ी | टीकमगढ़ | 01 अक्टूबर 2018 |
| 53-55वां | मऊगंज, पांढुर्णा, मैहर | रीवा, छिंदवाड़ा, सतना | अगस्त-अक्टूबर 2023 |
मध्यप्रदेश की वर्तमान भौगोलिक स्थिति
विभाजन के बाद मध्यप्रदेश भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बना हुआ है। प्रशासनिक सरलता के लिए नए जिलों का गठन एक निरंतर प्रक्रिया है।
- वर्तमान में कुल 55 जिले
- 10 प्रशासनिक संभाग
- उत्तर प्रदेश के साथ सर्वाधिक सीमा (14 जिले)
क्षेत्रफल विभाजन का तुलनात्मक ग्राफ