MPGK सुपर नोट्स – मध्यप्रदेश की जलवायु

Tez Education By Tez Education February 8, 2026

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म.प्र. जलवायु डैशबोर्ड

म.प्र. जलवायु

MP Climate Overview

उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु

मध्य प्रदेश भारत के मध्य में स्थित होने और कर्क रेखा के बीचों-बीच गुजरने के कारण उपोष्णकटिबंधीय जलवायु क्षेत्र में आता है। यहाँ मौसम और जलवायु की विविधता इसे भौगोलिक रूप से समृद्ध बनाती है।

औसत तापमान

21°C

औसत वर्षा

112 सेमी

कर्क रेखा

14 जिले

कर्क रेखा (Tropic of Cancer) मध्य प्रदेश

मुख्य जलवायु क्षेत्र

उत्तर का मैदान

महाद्वीपीय प्रकार की जलवायु। गर्मियों में अधिक गर्मी, ठंड में अधिक ठंड।

  • वर्षा: 75-100 सेमी
  • स्थान: नौगांव (गर्म)

मालवा का पठार

समशीतोष्ण जलवायु। फाह्यान ने इसे विश्व की सर्वश्रेष्ठ जलवायु कहा।

  • वर्षा: 50-75 सेमी
  • उत्तम विकास क्षेत्र

विंध्य पर्वतीय क्षेत्र

समशीतोष्ण। ग्रीष्म में साधारण गर्मी और शीत में अधिक ठंड।

  • वर्षा: 50-100 सेमी
  • चक्रवाती वर्षा

नर्मदा-सोन घाटी

मानसूनी जलवायु। ग्रीष्म ऋतु में अधिक गर्मी, शीत में साधारण ठंड।

  • वर्षा: 125-150 सेमी
  • पचमढ़ी (सर्वाधिक वर्षा)

वर्षा वितरण विश्लेषण

पचमढ़ी (सर्वाधिक वर्षा) 212 सेमी
रीवा-पन्ना (औसत वर्षा) 125 सेमी
म.प्र. औसत 112 सेमी
गोहद, भिंड (न्यूनतम वर्षा) 55 सेमी

* वर्षा की परिवर्तनशीलता दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ती है।

तापमान मुख्य बिंदु

सर्वाधिक औसत तापमान

गंजबासौदा (44°C)

न्यूनतम औसत तापमान

शिवपुरी

सर्वाधिक दैनिक तापान्तर

मार्च माह

द्वितीय ग्रीष्म ऋतु

सितम्बर-अक्टूबर

LU

अप्रैल-मई में चलने वाली शुष्क और गर्म पछुआ हवाओं को स्थानीय रूप से “लू” कहा जाता है।

जलवायु वर्गीकरण (विद्वानों के अनुसार)

ए. आर. सुब्रमण्यम (1991)

  • 1. अर्द्ध शुष्क अथवा स्टेपी
  • 2. गर्म शीतोष्ण वर्षा जलवायु
  • 3. उष्णकटिबंधीय आर्द्र एवं शुष्क

कोपेन (Koeppen)

  • Cwg आर्द्र उष्ण
  • Aw सवाना
  • Bshw उष्ण शुष्क

थार्न स्वेट

  • 1. तर अल्पार्द्र
  • 2. शुष्क अल्पार्द्र
  • 3. अर्द्ध शुष्क

म.प्र. की प्रमुख ऋतुएँ

ग्रीष्म ऋतु

(ऊनाला)

मार्च से मध्य जून। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ प्रारंभ।

निम्न वायुदाब क्षेत्र
‘लू’ का प्रभाव

वर्षा ऋतु

(चौमासा)

मध्य जून से मध्य अक्टूबर। दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगमन।

जुलाई में सर्वाधिक वर्षा
उच्च आर्द्रता

शीत ऋतु

(सियाला)

मध्य अक्टूबर से फरवरी। सूर्य के दक्षिणायन होने से तापमान में गिरावट।

‘मावठा’ चक्रवाती वर्षा
उच्च वायुदाब
ऋतु वेधशाला

इंदौर (RRCAT – एस चंद्रशेखर वेधशाला)

जंतर-मंतर (उज्जैन)

1719 में राजा जयसिंह द्वारा निर्मित

क्या आप जानते हैं?

शीतकाल में होने वाली वर्षा (12-18 सेमी) को मध्य प्रदेश में “मावठा” कहा जाता है। यह मुख्य रूप से पश्चिमी विक्षोभ के कारण होती है और गेहूं की फसल के लिए अमृत के समान मानी जाती है।

वर्ष 2024 में म.प्र. में सामान्य कोटे से 18% ज्यादा बारिश हुई है।
म.प्र. वर्षा वितरण डैशबोर्ड

मध्य प्रदेश वर्षा वितरण

Rainfall Distribution Analysis of Madhya Pradesh

सर्वाधिक वर्षा

पचमढ़ी (212 सेमी)

न्यूनतम वर्षा

गोहद (62.4 सेमी)

मानचित्र आधारित वितरण

निम्न वर्षा औसत से कम औसत वर्षा क्षेत्र औसत से अधिक पचमढ़ी गोहद
निम्न औसत से कम औसत अधिक

वर्षा का तुलनात्मक ग्राफ (सेमी)

न्यूनतम

निम्न वर्षा क्षेत्र

ग्वालियर-चंबल संभाग और भिंड क्षेत्र

62.4 सेमी तक

मुख्य स्थान: गोहद (भिंड)

औसत से कम

मालवा और पश्चिमी मध्य प्रदेश का क्षेत्र

75 – 100 सेमी

औसत वर्षा क्षेत्र

मध्य और उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश

100 – 150 सेमी

सर्वाधिक

औसत से अधिक

नर्मदापुरम संभाग और दक्षिण-पूर्वी जिले

212 सेमी तक

मुख्य स्थान: पचमढ़ी

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