MPGK सुपर नोट्स – मध्यप्रदेश के लोकपर्व, त्यौहार, उत्सव
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मध्य प्रदेश के लोकपर्व
संस्कृति, परंपरा और उत्सवों का संगम
क्षेत्रवार त्यौहारों की झलक
प्रतीकात्मक ग्राफ: त्यौहारों की विविधता के आधार पर
गणगौर
अवसर: चैत्र, भाद्र मास
निमाड़ का मुख्य पर्व। शिव-पार्वती की पूजा की जाती है। निमाड़ में चैत्र और मालवा में भाद्र मास में विशेष उत्सव।
भगोरिया पर्व
अवसर: होली के 7 दिन पूर्व
भील जनजाति का प्रसिद्ध उत्सव (झाबुआ, धार)। इसमें गुलालिया, गोलगधेड़ो और उजाड़िया हाट जैसे उप-पर्व शामिल हैं।
हिंगोट मार युद्ध
अवसर: दीपावली (गौतमपुरा, इंदौर)
एक अनोखा युद्ध जहाँ हिंगोट फल में विस्फोटक भरकर एक-दूसरे पर फेंके जाते हैं। मालवांचल की अनूठी परंपरा।
लारूकाज
अवसर: विवाह के अवसर पर
गोंड जनजाति का पर्व। नारायण देव के सम्मान में सुअर की बलि दी जाती है। दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों में प्रसिद्ध।
संजा एवं मामूलिया
अवसर: श्राद्ध पक्ष (16 दिन)
कुंवारी कन्याओं का पर्व। संजा में गोबर से दीवार पर चित्र बनते हैं। बुंदेलखंड में इसे ‘मामूलिया’ कहा जाता है।
मेघनाथ पर्व
अवसर: फाल्गुन (होली बाद)
कोरकू जनजाति द्वारा मनाया जाता है। घूमती हुई बल्ली पर युवाओं द्वारा करतब दिखाए जाते हैं।
📋 अन्य महत्वपूर्ण त्यौहार
सांस्कृतिक मानचित्र
- मालवा: नीरजा, गणगौर, संजा, घड़ल्या
- निमाड़: गणगौर (राजा), गंगा दशहरा, डोल ग्यारस
- बुंदेलखंड: मामूलिया, नवन्ना, सुआटा, हरछठ
- जनजातीय: भगोरिया, मेघनाथ, लारूकाज, छैरता