MPGK सुपर नोट्स – मध्य प्रदेश की शिल्प कला

Tez Education By Tez Education February 17, 2026

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मध्य प्रदेश की शिल्प कला – एक समृद्ध विरासत

मध्य प्रदेश की शिल्प कला

परंपरा, संस्कृति और अद्वितीय कलात्मकता का संगम

सामान्य परिचय

मध्य प्रदेश प्रारंभ से ही अपनी अद्वितीय कलात्मकता के लिए जाना जाता है। यहाँ की खजुराहो की भव्य मूर्तियाँ, पाषाण से निर्मित उत्कृष्ट शिल्प, प्राचीन मिट्टी के बर्तन और विभिन्न शैली की सामग्रियाँ इस समृद्ध विरासत का प्रमाण हैं। यहाँ की शिल्पकला न केवल अपनी भावनात्मक अभिव्यक्ति को दर्शाती है, बल्कि उसमें विविधता और सांस्कृतिक गहराई भी स्पष्ट झलकती है।

प्रमुख शिल्प श्रेणियाँ

काष्ठशिल्प
धातुशिल्प
गुड़िया शिल्प
मिट्टी शिल्प
पत्थर शिल्प

काष्ठ शिल्प (Wood Craft)

काष्ठ कला का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। जनजातियों द्वारा विकसित शिल्प यहाँ की पहचान है।

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खराद शिल्प: सहरिया जनजाति (श्योपुर, शिवपुरी, मुरैना)। खैर, शीशम की लकड़ी का प्रयोग।
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पचमढ़ी & शहडोल: आदिवासियों द्वारा मुखौटे और सजावटी वस्तुएं।
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बुधनी (सीहोर): खिलौना उद्योग के रूप में प्रसिद्ध। ‘एक जिला एक उत्पाद’ में शामिल।
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रीवा

सुपारी शिल्प

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अनूपपुर

काष्ठ मुखौटा

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बुधनी

खिलौना शिल्प

प्रमुख कलाकार

मुन्नालाल विश्वकर्मा

धातु शिल्प (Metal Craft)

अगरिया लौह शिल्प

मंडला, डिंडोरी, बालाघाट

  • अगरिया जनजाति (गोंड की उप-जनजाति)
  • अयस्क से लोहा प्राप्त कर कृषि उपकरण
  • सौंदर्यात्मक आभूषणों का निर्माण

चिचली पीतल शिल्प

नरसिंहपुर (चिचली क्षेत्र)

शिल्पकारों को ठठेरा/कसेरा कहा जाता है।

तकनीक:

रांज (टाँका) लगाना, इमली पानी से सफाई, जंतर प्रक्रिया (रेखाएं उकेरना)।

भरेवा/ढोकरा शिल्प

बैतूल

भरेवा: धातु की ढलाई करने वाले लोग।

सामग्री: मोम, सरई लकड़ी, राल, गोंद। “झोंपा” परंपरा पर आधारित।

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उचेहरा धातु शिल्प (सतना)

शिल्पकार ‘शंकर लाल’ को राष्ट्रपति पुरस्कार। काँसा (फूल) निर्माण हेतु प्रसिद्ध।

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टीकमगढ़ पीतल शिल्प

मोमक्षय विधि (Lost Wax Process) पर आधारित। “गाबो” और “कपो” निर्माण के प्रमुख चरण।

प्रसिद्ध साड़ियाँ एवं वस्त्र शिल्प

मध्य प्रदेश की शान, जिन्हें मिला है वैश्विक जी.आई. टैग

GI Tag 2005

चंदेरी साड़ी

“धूप-छांव साड़ी”

  • ✨ सुनहरी बॉर्डर मुख्य विशेषता
  • ✨ बिना गोंद हटाए ताने की रंगाई
  • ✨ रेशमी, मिश्रित और सूती प्रकार
GI Tag 2012

महेश्वरी साड़ी

“राजसी वैभव का प्रतीक”

  • ✨ अनूठी ज्यामितिक डिज़ाइन
  • ✨ पिटलूम (जमीन में गड़ी करघा) निर्माण
  • ✨ गरब रेशमी और नीम रेशमी प्रकार
GI Tag 2023

वारासिवनी साड़ी

“बालाघाट की महीन बुनाई”

  • ✨ रेशमी जोट और आंजना रेशमी कार्य
  • ✨ बारीक बुनाई के लिए विश्व प्रसिद्ध
  • ✨ सौसर-लोधीखेड़ा प्रमुख केंद्र

अन्य प्रमुख हस्तशिल्प/छापा पद्धति

बाघ प्रिंट (धार)

GI Tag 2008-09

बटिक प्रिंट (उज्जैन)

GI Tag 2023

भैरुगढ़ प्रिंट

उज्जैन

नंदना प्रिंट

नीमच

गोदना (Tattoo) कला

“गोदना को एहलौक से पारलौक (आत्मा की यात्रा) तक एक महत्त्वपूर्ण कड़ी माना गया है। यह जनजातीय महिलाओं की पहचान का प्रतीक है।”

बैगा गोदना: विश्व की सर्वाधिक गोदना प्रिय जनजाति
उराव गोदना: माथे पर 3 रेखाएं
गोदनहारी: कार्य करने वाली महिलाएं (देवार/मलार जाति)

अन्य महत्वपूर्ण शिल्प एवं केंद्र

गुड़िया शिल्प
ग्वालियर, झाबुआ
चर्म शिल्प
इंदौर, देवास
बाँस शिल्प
झाबुआ, मंडला
लाख शिल्प
उज्जैन, इंदौर

पत्थर शिल्प (GI Tag 2023)

जबलपुर (भेड़ाघाट)

ज़री-जरदोजी

भोपाल

पेपीयर माचे

उज्जैन

कंघी शिल्प

बंजारा समुदाय (रतलाम, उज्जैन)

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