MPGK सुपर नोट्स – मध्य प्रदेश के प्रमुख मेले एवं बोलियाँ
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मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर
प्रमुख मेले एवं बोलियाँ – एक विस्तृत संकलन
सर्वाधिक मेले
उज्जैन (~227)
न्यूनतम मेले
नर्मदापुरम (~13)
अंचलवार मेले (Fairs by Region)
मालवा अंचल
सिंहस्थ मेला
उज्जैनशिप्रा नदी के तट पर प्रत्येक 12 वर्ष में। अगला मेला: 2028
त्रिवेणी मेला
रतलामपौष माह, त्रिवेणी तट पर 11 दिवसीय मेला।
70वां महारुद्र यज्ञ जनवरी 2024 में हुआ।
तेजाजी का मेला
गुना (भामावद)आयोजन: फरवरी माह में।
निमाड़ अंचल
सिंगाजी मेला
स्थान: पिपल्या खुर्द (खंडवा)
शरद पूर्णिमा पर 7 दिन तक। इन्हें ‘निमाड़ का कबीर’ कहा जाता है।
कालूजी महाराज मेला
स्थान: पिपल्या खुर्द (खरगौन)
लगभग 200 वर्षों से जारी। यहाँ पशुओं की बीमारियों का इलाज किया जाता था।
अन्य प्रमुख मेले
- • शहीद मेला (सनावद)
- • नवग्रह मेला (खरगौन – मकर संक्रांति)
- • बालाजी मेला (बुरहानपुर)
सतपुड़ा एवं बघेलखंड
गोटमार मेला
पांढूर्णा (छिंदवाड़ा), जाम नदी
भादो मास की अमावस्या के बाद
महामृत्युंजय मेला
रीवा
शिवरात्रि व बसंत पंचमी
गधों का मेला
चित्रकूट (सतना)
औरंगजेब काल से प्रारंभ
✨ बुंदेलखंड के प्रसिद्ध उत्सव
जल बिहारी
छतरपुर – दशहरा से दीपावली
धामोनी उर्स
सागर – हजरत मस्तान शाह की मजार
जागेश्वरी देवी
चंदेरी (अशोकनगर) – चैत्र मास
मध्य प्रदेश की प्रमुख बोलियाँ (Dialects)
| बोली | उत्पत्ति | प्रमुख क्षेत्र | विशेष जानकारी |
|---|---|---|---|
| मालवी | शौरसेनी अपभ्रंश | इंदौर, उज्जैन, देवास | डॉ. के.एल. हंस ने इसे पश्चिमी हिंदी कहा। |
| निमाड़ी | शौरसेनी अपभ्रंश | खण्डवा, खरगौन, बड़वानी | जॉर्ज गियर्सन ने ‘दक्षिणी हिन्दी’ कहा। |
| बुंदेली | शौरसेनी अपभ्रंश | सागर, छतरपुर, दतिया | MP में सर्वाधिक बोली जाने वाली। |
| बघेली | अर्धमागधी अपभ्रंश | रीवा, सतना, सीधी | प्रथम नाटक ‘आनंद रघुनंदन’ इसी में है। |
आदिवासी भाषा
भीली
आर्य भाषा परिवार का हिस्सा
द्रविड़ परिवार
गोंडी
प्राथमिक शिक्षा में शामिल किया जाएगा
ग्वालियर क्षेत्र
ब्रज बोली
भिण्ड, मुरैना में प्रचलित