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शिक्षक पात्रता परीक्षा वर्ग-3
दिनांक: 12 Nov. 2024, Shift-1 | विषय: भाषा संस्कृत
Tez Education
गद्यांश (प्र. 1-8 के लिए):
गद्य और पद्यमय वाक्यों के द्वारा पौराणिक कथाओं को कहना हरिकथा नाम की एक विशेष कला है। कालक्षेप, हरिकथाकालक्षेप और सत्कथाकालक्षेप इसके अन्य नाम हैं। ईसा की उन्नीसवीं शताब्दी में द्रविड़ देश (दक्षिण भारत) में हरिकथा कला का प्रचार हुआ। केरल में भी इसे ‘हरि की कथा’ के अर्थ में प्रयोग किया जाता है। विभिन्न वाद्य यंत्रों की सहायता से इस कला रूप को प्रस्तुत किया जाता है। वन्दनश्लोक, निरूपण, पंचपदी, अंजनगीत और प्रथमपद इन पांच अंगों से हरिकथा युक्त होती है। इस कला के प्रदर्शन के समय कथावाचक में बोलने की चतुरता, उच्चारण की शुद्धता, पुराणों का ज्ञान और हास्य रस उत्पन्न करने की क्षमता अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। अंगवस्त्र, सिर का वस्त्र (पगड़ी), रुद्राक्ष की माला, सिन्दूर का तिलक और कुंडल धारण करके इस कला को प्रस्तुत किया जाता है। तंजावुर के कृष्ण भागवतर इस कला रूप के जन्मदाता हैं। प्रवचन, गीत और वाद्य के उचित मेल वाले इस कला रूप का सभी के द्वारा आनंद लिया जाता है।
परीक्षा परिणाम
कुल प्रश्न
30
सही
0
गलत
0