MPTET CDP Questions, पियाजे , कोहलबर्ग, वाइगोत्सकी, ब्रूनर

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Tez Education – Study Material

Topic:- पियाजे, कोहलबर्ग, वाइगोत्सकी, ब्रूनर

(By- Tez Education)

1. ऊषा, परिवेश की नई विशेषताओं को अपने चिन्तन में सम्मिलित करने, विद्यमान स्कीम में संशोधन कर रही है। वह कर रही है- समायोजन
2. संरचनात्मक दृष्टिकोण के अनुसार, अधिगम है- एक सक्रिय एवं सामाजिक प्रक्रिया
3. संरचनावादी सिद्धांतों के अनुसार अधिगम के बारे में सही कथन है- अधिगम सक्रिय विनियोजन के द्वारा ज्ञान की संरचना की प्रक्रिया है
4. संज्ञानात्मक विकास का अर्थ है- अभियोग्यता का विकास
5. संज्ञानात्मक विकास समर्थित होता है- एक समृद्ध और विविधतापूर्ण वातावरण उपलब्ध कराने से
6. पियाजे के सिद्धान्त के अनुसार, व्यक्ति के संज्ञानात्मक विकास को प्रभावित नहीं करेगी- भाषा
7. वह स्थान जहाँ बच्चे के ‘संज्ञानात्मक’ विकास को सबसे बेहतर तरीके से परिभाषित किया जा सकता है- विद्यालय एवं कक्षा पर्यावरण
8. संज्ञानात्मक विकास से सम्बन्धित है- जीन पियाजे, ब्रूनर
9. बच्चों में संज्ञानात्मक विकास, परिणाम है- आनुवंशिकता और वातावरण की पारस्परिक क्रिया का
10. परासंज्ञात्मक कौशल को निरुपित करता है- अपनी ही सोच की विधियों के विषय में सोचना
11. राघव एक झाडू, पर इस तरह से चढ़ने का अभिनय करता है मानों वह किसी घोड़े पर सवारी कर रहा हो। उसकी यह क्षमता कहलाती है- सांकेतिक प्रस्तुतीकरण
12. “बच्चे दुनिया को लेकर अपनी समझ को सक्रिय रूप से निर्मित करते है” यह कथन प्रस्तावित किया था- जीन पियाजे
13. जीन पियाजे के अनुसार, बच्चे ज्ञान को सक्रिय रूप से संरचित करते हैं, जैसे-जैसे वे दुनिया में व्यवहार कौशल का प्रयोग करते हैं तथा अन्वेषण करते हैं
14. जीन पियाजे के अनुसार अधिगम के लिए आवश्यक है- शिक्षार्थी के द्वारा पर्यावरण की सक्रिय खोजबीन
15. पियाजे के विचार से बच्चे सक्रिय ज्ञान-निर्माता तथा नन्हें वैज्ञानिक है, जो संसार के बारे में अपने सिद्धान्तों की रचना करते हैं
16. एक उपागम बच्चों की समझ एवं ज्ञान के सक्रिय संज्ञानात्मक सृजन पर बल देता है- पियाजे का सिद्धान्त इस उपागम का उदाहरण है
17. पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक विकास की वह अवस्था जिसमें परिकल्पनात्मक चिंतन विकसित होते हैं- औपचारिक संक्रियात्मक
18. पियाजे के अनुसार एक शिशु में आत्म धारणा का विकास आरम्भ होता है- 12 साल
19. “बालक की विवेचना (तर्क) तार्किक नहीं है और यह अंतर्ज्ञान (अंतर्बोध) पर आधारित है न कि व्यवस्थित तर्क पर।” पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक विकास की यह अवस्था कहलाती है- पूर्व-क्रियात्मक काल
20. पियाजे के अनुसार, अहंकेंद्रित है- बालक विश्व का केन्द्र है और हर चीज उसके इर्द-गिर्द घूमती है
21. मीना अब शब्दों का प्रयोग करने लगी है तथा यह समझने लगी है कि शब्द वस्तुओं के प्रतीक हैं। अब तर्क करने लगी है परन्तु प्रत्ययों का संरक्षण और क्रमबद्धता नहीं कर पाती। मीना, पियाजे के संज्ञानात्मक विकास की अवस्था पर है- पूर्व संक्रियात्मक
22. एक बच्चा कहता है कि उसका दोस्त जो 5 फीट लंबा है, वह अपने चाचा से बड़ा हो सकता है, जो केवल 4 फीट लंबा है। किसी व्यक्ति की ऊँचाई की व्याख्या करने के इस दृष्टिकोण में बच्चे को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है- पूर्व संक्रियात्मक अवस्था को
23. नाइवा के पिता के बाल सफेद और लम्बे हैं, इसलिए वह सोचती है कि सभी के पिता के बाल सफेद और लम्बे हैं। यह दृष्टिकोण अवस्था में है- पूर्व संक्रियात्मक अवस्था
24. जीन पियाजे की संज्ञानात्मक विकास की अवस्थाओं के अनुसार जिसे पूर्व-प्रत्यात्मक काल के रूप में जाना जाता है, सम्बन्धित है- पूर्व संक्रियात्मक अवस्था से
25. पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक विकास की द्वितीय अवस्था है- पूर्व-संक्रिया की अवस्था
26. वह अवस्था जिसमें बच्चे वस्तु स्थायित्व की समझ तो बना लेते हैं परंतु यह नहीं समझ पाते कि क्रियाएँ परिवर्तनीय हैं और उनके निर्णय चीजों की मौजूदा दिखावट पर निर्भर करते हैं- पूर्व-संक्रियात्मक
27. जिस स्तर पर बच्चों में अपने आस-पास की दुनिया के बारे में एक जीववादी दृष्टिकोण होता है और वे मानते हैं कि पेड़-पौधों और चलते हुए बादलों और लुढ़कते पत्थरों की मंशाएँ और इरादे हो सकते हैं- पूर्व संक्रियात्मक अवस्था
28. बच्चा समझ बना लेता है कि प्रतीकों का इस्तेमाल वस्तुओं को प्रतिनिधित्व करने के लिए किया जा सकता है-अगर बच्चे के सामने ‘साइकिल’ नहीं है तब भी ‘साइकिल’ शब्द सुनकर उसके मस्तिष्क में एक प्रतिबिंब बन जाता है- पूर्व संक्रियात्मक अवस्था
29. अफसा आलू की एक चिप्स को दिखाते हुए कहती है- ‘तितली’। जीन पियाजे के अनुसार इस प्रकार का प्रतीकात्मक विचार की विशेषता है- पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में
30. पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में बच्चे लाक्षणिक कार्य करना प्रारंभ कर देते हैं और उनमें भाषा कौशल तेजी से विकसित होता है
31. पियाजे के अनुसार, पूर्व-संक्रियात्मक काल में बालक वस्तुओं के लिए प्रतीकों का इस्तेमाल करने लगते हैं और तार्किक मानसिक समझ उभरने लगती हैं
32. विकास की पूर्वसंक्रिया अवस्था दिया था- पियाजे

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