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Topic- विकास की अवधारणा और अधिगम के साथ उसका संबंध
(By- Tez Education)
1. बच्चों की लम्बाई और वजन में वृद्धि का उदाहरण है- मात्रात्मक परिवर्तन
2. ऐसे बच्चे जिन्होंने बहुत कम उम्र में गंभीर (मानव) सामाजिक अभाव का अनुभव किया है, आमतौर पर उनके विकास में देरी या बाधा उत्पन्न होती है और पुनर्वास के बावजूद विकास के कुछ क्षेत्रों में सुधार अधीनस्थ होने की संभावना है। यह अवधि जिसमें विकास पर्यावरणीय समर्थन से महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित होता है- संवेदनशील अवधि
3. विकास के किस पहलू में तर्क, चिंतन और समस्या समाधान की व्याख्या है- संज्ञानात्मक विकास
4. विकास की गति एक व्यक्ति से दूसरे में भिन्न होती है, किन्तु यह एक नमूने का अनुगमन करती है- क्रमबद्ध और व्यवस्थित
5. शारीरिक अंगों अथवा संपूर्ण जीव की बढ़ोतरी को कहते हैं- संवृद्धि
6. बच्चे की वृद्धि मुख्यतः सम्बन्धित है- शारीरिक विकास से
7. शारीरिक वृद्धि और विकास को कहते हैं- अभिवृद्धि
8. बच्चों की वृद्धि और विकास की अवधारणा में है- वृद्धि केवल जैविक और भौतिक परिवर्तन को संदर्भित करता है लेकिन विकास मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक परिवर्तनों को संदर्भित करता है, वृद्धि स्थिर है किन्तु विकास एक सतत् प्रक्रिया है
9. विकास के प्रत्येक चरण के लिए सामाजिक अपेक्षा को कहा जाता है- विकासात्मक कार्य
10. बाल विकास में गर्भधारण से किशोरावस्था तक होने वाली वृद्धि व बदलाव का अध्ययन किया जाता है।
11. विकास सामान्य से विशिष्ट की ओर बढ़ता है।
12. विकास तब होता या होती है, जब परिपक्वता और अनुभव के कारण मनुष्य में क्रमबद्ध और प्रगतिशील परिवर्तन होते हैं- विकास
13. व्यक्ति के विकास की प्रक्रिया के बारे में सही कथन है- विकास की प्रक्रिया में सांस्कृतिक विविधताएँ होती हैं
14. “विकास के परिणामस्वरूप नवीन विशेषताएँ और नवीन योग्यताएँ प्रकट होती हैं” यह कथन दिया है- हरलॉक
15. ‘विकास’ शब्द में दोनों संरचनात्मक तथा प्रक्रियात्मक बदलाव निहित है।
16. विकास के विषय में सही वक्तव्य है- विकास परिवर्तनीय है
17. विकासात्मक परिवर्तन- वंशानुगत कारकों और पर्यावरणीय प्रभावों की परस्पर क्रिया है
18. विकास में वृद्धि से तात्पर्य है- आकार, सोच, समझ कौशलों में वृद्धि
19. विकास के व्यापक आयामों की सही पहचानकर्ता है- शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक और संवेगात्मक
20. बाल विकास में गुणात्मक परिवर्तन की पहचान है- दृष्टि
21. यौन परिपक्वता में महत्वपूर्ण हाथ है- पीयूष ग्रंथि का
22. 10 से 12 महीने की परिपक्वता में बच्चा पहला कदम चलने लगता है।
23. एक व्यक्ति, मांसपेशियों का उपयोग करना सीखता है और इसके कारण एक कौशल प्राप्त करता है- परिपक्वता
24. एक शिक्षार्थी की परिपक्वता का सबसे अच्छा वर्णन करता है- यह व्यक्तिगत विकास की एक सतत् प्रक्रिया है
25. आनुवंशिक विन्यास के पूर्वनिर्धारित रूप से प्रकट होने की प्रक्रिया कहलाती है- परिपक्वता
26. परिपक्वता विशेषता परिपक्वता को अधिगम से अलग करती है। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।
27. परिपक्व विद्यार्थी- अपनी बौद्धिकता के साथ अपने सभी प्रकार के द्वंद्वों का शीघ्र समाधान कर लेते हैं
28. सामान्य परिपक्वन से पहले प्रशिक्षित करना प्रायः- लाभकारी हो या हानिकारक, यह इस पर निर्भर करता है कि प्रशिक्षण में किस प्रकार की विधि का प्रयोग किया गया है
29. विकास का वही सम्बन्ध परिपक्वता से है जो उद्दीपन का प्रतिक्रिया से।
30. विकास निर्भर है- आनुवंशिक बनावट, भौतिक वातावरण, सामाजिक-सांस्कृतिक कारक
31. विकास के लिये उचित है- ‘सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ’ विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है
32. पालन पोषण की आधिकारिक शैली आधारित है- जब संभव हो तब बच्चे के साथ साझेदारी में निर्णय लेना
33. बच्चों के व्यक्तित्व के सौहार्दपूर्ण विकास के लिये माता-पिता को चाहिये- घर में अनुकूल वातावरण प्रदान करना
34. विकास प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली प्रमुख ग्रन्थि है- पीयूष
35. वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करने वाले कारक हैं- आनुवंशिकता, भौतिक दशाएं, सामाजिक एवं सांस्कृतिक दशाएं
36. खेल युवा, बच्चों के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि- यह समय बिताने का एक सुखद तरीका है।
37. आजकल अधिकतर विद्यालयों में सहभागी समूह के लिए प्राथमिक ध्यान आधारित होता है- आयु स्तर पर
38. बालक की प्रथम पाठशाला है- परिवार
39. निर्धन परिवारों के बच्चे जो छोटे आकार के परिवार से सम्बद्ध हैं उनको विकास के बेहतर वातावरण पाने के मौके होते हैं क्योंकि उन्हें बड़े परिवारों के निर्धन बच्चों की अपेक्षा- बेहतर परिस्थितियां प्राप्त होती हैं
40. शारीरिक गठन के अतिरिक्त सभी वातावरणीय कारक विकास को आकार देते हैं।
41. कथन बच्चे के विकास में परिवेश की भूमिका का समर्थन करता है- पिछली कुछ शताब्दियों में बुद्धि लब्धांक परीक्षा में शिक्षार्थियों के औसत प्रदर्शन में लगातार वृद्धि हुई है
42. बच्चों में लिंग पहचान स्थापित होती है- 2 वर्ष से
43. ‘विकासात्मक कार्य’ प्रचलित किया था- हैविगहर्स्ट
44. मानव विकास का सही क्रम है- शैशवावस्था, बाल्यावस्था, किशोरावस्था, प्रौढ़ावस्था
45. जन्मोत्तर (जन्म के बाद की) विकास की दूसरी प्रमुख अवस्था है- बाल्यावस्था
46. शैशवावस्था होती है- पाँच वर्ष तक
47. बाल्यावस्था अवस्था होती है- बारह वर्ष तक
48. मध्य-बचपन अवधि है- 6 वर्ष से 11 वर्ष
49. प्रारंभिक बचपन की आयु माना जाता है- 2 से 6
50. आयु समूह परवर्ती बाल्यावस्था श्रेणी के अन्तर्गत आता है- 6 से 11 वर्ष
51. गर्भधारण से लेकर जन्म तक की अवस्था को कहा जाता है- प्रसवपूर्व
52. पैदा होने से पहले का विकास मुख्यतौर पर बांटा है- जीवाणु, भ्रूण अवस्था, भ्रूणीय अवस्था
53. जन्मपूर्व विकास का सही क्रम है- युग्मनज, भ्रूण, गर्भस्थ शिशु
54. विकास शुरू होता है- पूर्व प्रसव अवस्था
55. गर्भस्थ शिशु में संवेदनशीलता का विकास प्रारंभ होता है- सिर से
56. गर्भ में बालक को विकसित होने में कुल दिन लगते हैं- 280
57. 6 या 7 वर्ष का बालक दूसरों के विचारों को स्वीकार करने के योग्य नहीं होता, क्योंकि- वह अहम् केन्द्रित होता है
58. दो वर्ष की समाप्ति पर एक शिशु का शब्द ज्ञान होता है- 150 शब्द
59. अनुकरण की प्रक्रिया में सर्वप्रथम शिशु अनुकरण करता है- स्वर वर्णों का
60. नर्सरी कक्षा में शुरुआत करने के लिए सबसे अच्छी विषयवस्तु है- मेरा परिवार
61. एक बच्चा ईर्ष्या का प्रदर्शन करता है- 18 माह की आयु में
62. शिशुओं के मस्तिष्क को ‘खाली स्लेट’ माना था- जॉन लॉक
63. नवजात शिशु का भार होता है- 7 पाउंड
64. ‘गाल को छूने पर सिर को घुमाना एवं मुख खोलना’ नवजात शिशुओं में उपस्थित रूूटिंग प्रकार के प्रतिवर्त के अन्तर्गत आता है।
65. बच्चे तकरीबन इस आयु से सहकर्मी समूह प्रभाव का अनुभव करना शुरू कर देते हैं- तीन वर्ष
66. विकास का वह चरण जब कोई जीव सबसे तेजी से किसी विशेष कौशल या विशेषता को प्राप्त कर सकता है, कहलाता है- संवेदनशील अवधि
67. बच्चों के विकास के संदर्भ में ‘संवेदनशील चरण’ से तात्पर्य है- किसी व्यक्ति में विशिष्ट क्षमताओं के उत्थान का इष्टतम चरण
68. उस विशिष्ट समय को कहा जाता है जब बच्चे उनके वातावरण में खास प्रकार से उद्दीपन के प्रति विशेष रूप से ग्रहणक्षम होते हैं- संवेदनशील अवधि
69. शारीरिक विकास किस स्तर पर तेजी से होता है- शैशवावस्था में
70. बच्चों में आदत विकसित होती है- जन्म से
71. मनोभाव विकसित होता है- शैशव काल में
72. बालक को शिशु कहे जाने की आयु होती है- जन्म से तीन वर्ष तक
73. पूर्व-प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने के लिए उपयुक्त आयु है- 2-6 वर्ष
74. शैशवावस्था को सीखने का आदर्श काल कहा है- वेलेन्टाइन
75. बच्चों में सबसे अधिक पाये जाने वाला स्वभाव है- अनुकरण करने का
76. बाल विकास की अवस्था जिसको भाषा सीखने की सर्वोत्तम अवस्था कहा जाता है- शैशवावस्था
77. शैशवावस्था में शब्दों को दोहराने की प्रवृत्ति विशेष रूप से पाई जाती है।
78. नवजात शिशु की सांवेदिक क्षमताओं पर किये गये शोध बताते हैं कि- नवजात शिशु कई चीजें कर सकता है जैसे आवाज, रंग व गंध को पहचानना
79. शैशवावस्था मानव विकास की प्रथम प्रमुख अवस्था है।
80. शैशवावस्था में बच्चों के क्रिया-कलाप मूलप्रवृत्त्यात्मक होते हैं।
81. स्व-केन्द्रित अवस्था होती है बालक के- 3 से 6 वर्ष तक
82. शिशु छह महीने की उम्र तक अजनबियों से झिझकना या शर्माना विकसित करते हैं।
83. प्रारंभिक अवस्था में शिशु अत्यधिक स्वकेन्द्रित होते हैं।
84. विकास का एक अधिनियम है कि विकास प्रतिमान के विभिन्न काल में खुशी भिन्न-भिन्न होती है। इस अधिनियम के अनुसार- जीवन का प्रथम वर्ष सबसे अधिक खुशी का एवं वयः सन्धि काल सबसे अधिक दुःखी काल होता है
85. 6-11 वर्ष आयु वर्ग के छात्रों की आवश्यकता है- कक्षा-कक्ष में प्रजातांत्रिक वातावरण की सीखने में स्वायत्तता की क्रिया आधारित, अन्तःक्रियात्मक अधिगम की
86. बच्चे का सामाजिक विकास वास्तव में प्रारम्भ होता है- उत्तर बाल्यावस्था में
87. माँ-बाप के साये से बाहर निकल अपने साथी बालकों की संगत को पसन्द करना सम्बन्धित है- उत्तर बाल्यावस्था से
88. उत्तर बाल्यावस्था को और भी नाम से जाना जाता है- गिरोहावस्था
89. बेहतर एथलेटिक (शारीरिक) क्षमताएँ, नियमों के साथ खेलों में भागीदारी, तार्किक विचार प्रक्रियाएँ जो ठोस अनुभवों के आसपास केन्द्रित होती हैं, ये मध्य बचपन अवधि के लक्षण हैं।
90. बाल्यावस्था से अभिप्राय है- यह एक सामाजिक संरचना है
91. वह अवस्था जिसमें बच्चे अपने समवयस्क समूह के सक्रिय सदस्य हो जाते हैं- बाल्यावस्था
92. बाल्यावस्था की अवधारणा से अभिप्राय है- समकालीन सामाजिक-संरचनावादी मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यह एक सामाजिक संरचना है
93. बच्चों का द्वितीयक सामाजिकरण पारंपरिक बाल्यावस्था में प्रारंभ हो जाता है जब वह स्कूल जैसे औपचारिक संस्थानों में जाना शुरू कर देते हैं।
94. राघव जब शिशु था तब उसे माता-पिता के स्नेह से वंचित रहना पड़ा। बाल्यावस्था के आगे के चरण में उसे बहुत संवेदनशील अध्यापक मिले। फिर भी उसे लोगों पर विश्वास करने में परेशानी होती है और वह जोखिम लेने का साहस नहीं दिखा पाता। राघव के विषय में विकास का जो मुद्दा एकदम स्पष्ट रूप से वर्णित होता है- आरंभिक-बाद के अनुभवों का मुद्दा
95. भाषा अर्जन के सन्दर्भ में संवेदनशील चरण है- प्रारंभिक बाल्यावस्था
96. खिलौनों की आयु पूर्व बाल्यावस्था को कहा जाता है।
97. वह अवस्था जिसमें प्रतीकात्मक खेल बढ़ता है तथा संज्ञानात्मक विकास को समर्थन देता है- प्रारंभिक बाल्यावस्था
98. आरम्भिक बाल्यकाल का आयु समूह काल होता है- 2 से 6 वर्ष
99. 2 वर्ष से 6 वर्ष की अवधि को कहा जाता है- प्रारम्भिक बचपन
100. वह बच्चा जो मध्य बाल्यावस्था में होगा- एक बच्चा जिसने नियमों के अर्थ की समझ विकसित कर ली है और तर्क कर सकता है
101. वह अवस्था जिसमें शारीरिक, मानसिक और व्यक्तित्व का मूलभूत विकास होता है- बाल्याकाल
102. बच्ची जो मध्य बाल्यावस्था में होगी- एक बच्ची जो तार्किक रूप से तर्क कर सकती है और संरक्षण कर पाती है
103. ‘मध्य बाल्यावस्था’ की विशेषता है- बच्चे तार्किक एवं मूर्त रूप से सोचना प्रारंभ कर देते हैं
104. लज्जा एवं गर्व का भाव बाल्यावस्था में विकसित होता है।
105. एक बच्चे में रचनात्मक (Constructive)विकास प्रारम्भ होता है- बाल्यावस्था के दौरान
106. बालक द्वारा लम्बे समय तक रोने पर भी पिता द्वारा खिलौना न देने का परिणाम होगा- प्रतिगमन
107. बालक की वह अवस्था जिसमें हंसता कम है और मुस्कुराता ज्यादा है जिसका अर्थ है कि अपने संवेगों को नियंत्रित करना सीख जाता है- उत्तर बाल्यकाल
108. बाल्यावस्था का लक्षण है- सामाजिक संकल्पना
109. उत्तर बाल्यावस्था में बालक भौतिक वस्तुओं के किस तत्व में परिवर्तन को समझने लगते हैं- द्रव्यमान, संख्या और क्षेत्र
110. रॉस के अनुसार विकास की वह अवस्था जिसको ‘मिथ्या परिपक्वता काल’ कहा गया है- बाल्यावस्था
111. ‘मूर्त परिस्थितियों के माध्यम से समझने लग जाना बाल्यावस्था में बौद्धिक विकास अवस्था से संबंधित है।
112. 6-11 वर्ष आयु वर्ग के बालकों की विशेषताएँ हैं- बालक सीखने में रुचि नहीं रखते हैं
113. एक असामान्य 12 वर्ष की आयु के बच्चे में सबसे अधिक होना संभव है- समकक्ष के अनुमोदन के लिए बेचैनी
114. अर्नेस्ट जोन्स के अनुसार, किशोरावस्था की आयुसीमा है- 12 साल से 18 साल
115. किशोर काल में किसी एक शिशु को ………..का सामना करना पड़ता है- यौन संबंधी समस्याएँ, मानसिक संकट की समस्या, अपराध प्रवणता की समस्या, सामाजिक समायोजन की समस्या, आत्मनिर्भरता की समस्या
116. वे गणितीय प्रश्न जो परिकल्पना परिस्थितियों से संबंधित हैं और बीजगणितीय कथन आलेखित करते हैं, प्रारंभिक पाठ्यचर्या का एक भाग हैं। इस विचार का आधार है कि किशोरावस्था के छात्र ……… कार्य करने में सक्षम हैं- अमूर्त चिंतन
117. वह अवधि जिसके दौरान विचार अमूर्त और आदर्शवादी हो जाता है- किशोरावस्था
118. किशोरावस्था की विशेषताओं को सर्वोत्तम रूप से व्यक्त करने वाला एक शब्द है- परिवर्तन
119. विकास की अवस्था जिसमें स्वतंत्रता की स्थापना, अस्मिता का विकास और अमूर्त चिंतन की अवस्था का लक्षण है- किशोरावस्था
120. विकास की वह अवधि, जब आत्मसात मानकों पर प्रश्न उठाया जाता है और अक्सर परिवार की तुलना में साथियों की राय बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है- किशोरावस्था
121. विकास के चरण जिसमें बहुत से हार्मोन संबंधी परिवर्तन होते हैं तथा अपनी पहचान की सक्रिय खोज पर बल होता है- किशोरावस्था
122. जीवन की वह अवस्था जिसका प्रारंभ यौवनारंभ से होता है जब यौन परिपक्वता या प्रजनन करने की योग्यता प्राप्त कर ली जाती है, साधारणतया कहलाती है- किशोरावस्था
123. जीवन का वह काल जब शरीर में प्रजनन परिपक्वता संबंधी परिवर्तन होता है, कहलाता है- किशोरावस्था
124. बच्चे के विकास का वह चरण जिसके दौरान सृजनात्मकता और कल्पना शक्ति अत्यधिक प्रबल होती है- प्रारंभिक किशोरावस्था (14-18)
125. किशोरावस्था/टीन की उम्र होती है- 13-18 वर्ष
126. किशोरावस्था के दौरान कई प्रकार के तनाव और चिंताएँ होती हैं। शिक्षकों को चाहिए- सहानुभूतिशील होना और सतर्कतापूर्ण व्यवहार से आगे बढ़ना
127. ऊँची भावुकता, उत्साह और अवसाद की अवधि, भावनाओं के निर्माण और मनोदशाओं के रूप में जाना जाता है- किशोरावस्था
128. सभी किशोर ………… का अनुभव कर सकते हैं। दुश्चिंता और स्वयं से सरोकार
129. ‘Adolescence’ (किशोरावस्था) एक यूनानी शब्द ‘adolescere’ से बना है, जिसका सबसे उचित अर्थ है- परिपक्व विकास
130. पहचान निर्माण किया जाता है- किशोरावस्था में
131. कक्षा शिक्षण-अधिगम अंत: क्रियाओं को सुधारने हेतु ………. रणनीति उत्तर किशोरावस्था के विकास से संबंधित है- विचारों के मुक्त आदान-प्रदान के साथ आदर्शीकरण
132. किशोर जोखिमपूर्ण व्यवहारों में भाग ले सकते हैं क्योंकि वे- अपनी किसी भी गतिविधियों के बारे में तार्किक रूप से सोच नहीं पाते
133. वह अवस्था जिसमें शारीरिक, मानसिक एवं संवेगात्मक परिवर्तन शीघ्र होते हैं- किशोरावस्था
134. पद ‘संवेगात्मक क्रान्ति’ जिस अवस्था से अधिक जुड़ा हुआ है- किशोरावस्था से
135. वह अवधि जो वयस्कता के संक्रमण की पहल करती है, उसे कहते हैं- किशोरावस्था
136. बाल विकास का वह चरण जिसमें विपरीत लिंग की ओर अधिकतम आकर्षण दिखता है- किशोरावस्था
137. विकास की वह अवस्था जिसे ‘तनाव एवं तूफान की अवस्था’ कही जाती है- किशोरावस्था
138. ‘किशोरावस्था’ है एक “तूफान और पीड़न” (Storm and stress) काल-इस कथन को कहा था- स्टेनले हॉल
139. वीर पूजा की भावना जाग्रत होती है- किशोरावस्था में
140. शारीरिक एवं मानसिक परिपक्वता प्राप्त व्यक्तियों को कहा जाता है- किशोर
141. एक 13 वर्षीय बालक बात-बात में अपने बड़ों से झगड़ा करने लगता है और हमेशा स्वयं को सही साबित करने की कोशिश करता है। यह अवस्था कहलाती है- किशोरावस्था
142. सहपाठियों का दबाव जब सबसे अधिक प्रभाव डालता है, वह है- उत्तर किशोरावस्था
143. किशोरावस्था में बच्चे समस्या का सामना करते हैं- शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तन से समायोजन करना
144. हॉल का सिद्धांत व्याख्या करता है- किशोरावस्था का विकास
145. ‘विद्रोह की भावना’ की प्रवृत्ति ………….से सम्बन्धित है। पूर्व किशोरावस्था
146. 14 वर्षीय देविका अपने-आप से पृथक् स्वनियंत्रित व्यक्ति की भावना को विकसित करने का प्रयास कर रही है। वह विकसित कर रही है- स्वायत्तता
147. किशोरावस्था में संवेगों की तीव्रता प्रकट होती है- प्रतिकूल पारिवारिक सम्बन्ध, व्यवसाय की समस्या, नई परिस्थिति के साथ समायोजन
148. पूर्वाग्रही किशोर/किशोरी अपनी ……… के प्रति कठोर होंगे। समस्या
149. समान-लिंग मित्रता……….. के दौरान प्रबलित होती है। प्रारंभिक किशोरावस्था
150. एक व्यक्ति ……. के दौरान पौरुष या स्त्रैण सामाजिक भूमिका प्राप्त करता है। किशोरावस्था
151. उचित यौन शिक्षा. ………….. पर प्रदान की जानी चाहिए। किशोरावस्था
152. बच्चों का/के शारीरिक विकास- एक व्यवस्थित और अनुक्रमिक तरीके से होता है, लेकिन अलग-अलग बच्चों के विकास की दर अलग-अलग होती है
153. शारीरिक विकास का एक प्रमुख नियम है- द्रुतगामी विकास का नियम
154. शारीरिक विकास को प्रभावित करने वाला कारक है- वातावरण, वंशानुक्रम, खेल तथा व्यायाम
155. अन्त:स्रावी ग्रन्थियों को ………. भी कहा जाता है। नलिका विहीन ग्रन्थियां
156. ‘होम्योस्टेसिस’ शब्द दिया था- कैनन
157. बच्चों के शारीरिक विकास को प्रभावित करता है- भौगोलिक वातावरण, पौष्टिक भोजन, अन्त:स्रावी ग्रंथियाँ
158. शारीरिक विकास का क्षेत्र है- स्नायुमण्डल, मांसपेशियों की वृद्धि, एंडोक्राइन ग्लैण्ड्स
159. ‘समानान्तर खेल’ है- अलग-अलग खेलना
160. जब एक कीमोथेरापी पर चल रहे मरीज को अस्पताल को देखते ही उल्टी जैसा लगे तब अस्पताल ……………. हो गया है। सी.एस.
161. एम.आर.आई. ……………….. की एक प्रक्रिया है। तंत्रिका प्रतिबिम्ब
162. वह अवधि जिसमें शारीरिक वृद्धि एवं विकास तीव्र गति से घटित होता है- शैशवावस्था एवं प्रारंभिक बाल्यावस्था
163. सामान्यतया लड़के और लड़कियों में शारीरिक विकास की, विशेषता प्रेक्षित की जाती है- लड़कियां शारीरिक विकास में दो-तीन वर्ष आगे होती हैं
164. वेटलिफ्टर (पहलवानों) को आमतौर पर मांसपेशियों और शरीर को पुष्ट बनाना होता है उन्हें आहार में लेना चाहिए- प्रोटीन
165. मास्टर ग्रंथि के नाम से जाना जाता है- पीयूष ग्रंथि
166. शरीर के आकार में वृद्धि होती है- शारीरिक और गत्यात्मक विकास के कारण
167. शारीरिक विकास का एक प्रमुख नियम है- अनियमित विकास का नियम
168. ‘बच्चे के उचित विकास को सुनिश्चित करने के लिए उसका स्वस्थ शारीरिक विकास एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है।‘ यह कथन सही है, क्योंकि- शारीरिक विकास, विकास के अन्य पक्षों के साथ अंत:सम्बन्धित है
169. बच्चों में शारीरिक विकास जिस आयु सीमा में धीमा हो जाता है- 5-6 वर्ष
170. मानव शरीर में सबसे छोटी हड्डी यानि स्टेपोज कान के ……….होती है। बीच में
171. वृद्धि और विकास का प्रथम चरण है- शारीरिक विकास
172. केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र में होते हैं- मस्तिष्क तथा मेरुदण्ड
173. तीसरी कक्षा के विद्यार्थियों के स्तर के अनुकूल सूक्ष्म गतिक कौशल का उदाहरण है- एक धागे में मोती पिरोना
174. गत्यात्मक और संज्ञानात्मक विकास ………. होता है। सम्पूर्ण जीवनकाल के दौरान
175. सूक्ष्म क्रियात्मक कौशल नहीं है- कूदना
176. स्थूल कौशल के उपयोग का एक उदाहरण है- एक पैर पर संतुलन करना
177. ……….स्थूल गत्यात्मक चालन कौशल का उदाहरण है जबकि ……….में सूक्ष्म गत्यात्मक कौशल की आवश्यकता होती है। भागना, चित्र बनाना
178. उत्कृष्ट मोटर कौशल का एक उदाहरण है- लिखना
179. मिट्टी से खिलौने बनाने के दौरान एक बालिका को अपने जिस कौशल को विकसित करने का अवसर मिलेगा- सूक्ष्म क्रियात्मक कौशल
180. श्रीमती कुमार का पहला बच्चा 10 महीने में चलने लगा। उनका दूसरा बच्चा अब 12 महीने का है और अभी भी नहीं चल रहा है। वह दु:खी या चिन्तित नहीं है, क्योंकि- वह जानती हैं कि चलने के विकास के लिये वह अभी सामान्य समयबद्ध के अन्दर है
181. चालक विकास की दर में व्यक्तिगत विविधताएँ होती हैं, फिर भी चालक विकास का क्रम …….. से …….. तक है। अपरिष्कृत (स्थूल) चालक विकास; परिष्कृत (सूक्ष्म) चालक विकास
182. सामाजिक परिवेश से तात्पर्य है- शिक्षक व समाज, संबंधी, मित्र, पड़ोसी, माता-पिता व परिवार के सदस्य
183. ‘साथी समूह’ से तात्पर्य है— एक व्यवसाय में कार्यरत लोग, मित्र
184. वह अवस्था जब बालक अपने अभिभावकों के साथ कम आनन्दित होता है, सम्बन्धित है उसके— सामाजिक विकास से
185. सामाजिक विकास से संबंधित चरण जिसमें व्यक्ति समूह, समाज और राष्ट्र के बृहत्तर हितों में अपने हित को त्याग सकता है— किशोरावस्था
186. आक्रामकता का कारण सामाजिक हो सकता है, न कि— जीववैज्ञानिक, शरीर विज्ञान संबंधी
187. सामाजिक विकास अनिवार्य रूप से एक विषय है— सामाजिक व्यवस्था के उद्देश्यों के साथ स्वयं के उद्देश्यों का एकीकरण
188. बच्चों के सामाजिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक हैं— सामाजिक परिवेशजन्य तत्व
189. बालक का सामाजिक विकास प्रभावित होता है— सामाजिक-आर्थिक स्तर से, विद्यालय से, परिवार से
190. शिशु का सामाजिक विकास निर्भर करता है— दूसरों से बातचीत करने के अवसरों पर
191. बच्चे के सामाजिक विकास को प्रभावित कर सकता है— पुरानी बीमारी
192. सामाजिक रूप से अपरिपक्व छात्रों को ……… छात्रों के रूप में जाना जाता है।— निर्भर
193. जैसे-जैसे शिशु विकसित होता है, वैसे-वैसे उसकी मानसिक क्षमता— बढ़ती है
194. परासंज्ञान/अधिसंज्ञान है— अपनी खुद की सोच के बारे में सोचने की प्रक्रिया
195. एक शिक्षिका अपने विद्यार्थियों के बीच संज्ञानात्मक प्रबोधन कौशल को सुसाध्य करना चाहती है। इस उद्देश्य के लिए बचना चाहिए— त्रुटियों को बिना चर्चा के खारिज करना
196. विकास का वह क्षेत्र जिसका संबंध बौद्धिक सामर्थ्यों जैसे कि ध्यान, स्मृति समस्या समाधान कल्पना और रचना करने से है— संज्ञानात्मक क्षेत्र
197. बच्चों में विवेचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देने का उदाहरण है— पता करो कि तटीय इलाके में रहने वाले लोग क्या खाते हैं व क्यों
198. संज्ञानात्मक विकास का अर्थ है— बुद्धि का विकास
199. संज्ञानात्मक विकास का तात्पर्य है— ग्रहण की गई संवेदी सूचनाओं का रूपान्तरण, ग्रहण की गई सूचनाओं का विस्तारण, सूचनाओं का संग्रहण एवं पुनः प्रस्तुतीकरण
200. ‘जेण्डर स्कीमा थ्योरी’ प्रस्तावित की थी— एस.एल. बेम
201. बच्चों में सृजनात्मकता का विकास करना, विकास के …………. आयाम से संबंधित है।— मानसिक
202. बालक के ‘बौद्धिक विकास’ से तात्पर्य है— समझ, कल्पना, तर्क
203. एक बालक की संज्ञानात्मक शक्तियाँ जैसे कल्पना-शक्ति, बुद्धि, निर्णय लेने की क्षमता, आदि का संबंध है बालक के— मानसिक विकास से
204. मानसिक विकास के तहत आने वाला आयाम है— भाषा
205. संज्ञानात्मक विकास का अर्थ है— अभियोग्यता का विकास
206. मानसिक वृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है— सीखना तथा परिपक्वता दोनों
207. मानसिकता के सिद्धांत का सबसे अच्छा वर्णन करता है— प्रौढ़ मानसिकता, असफलता को एक मामूली रुकावट के रूप में देखती है, सुधारने और विकसित होने का अवसर देती है
208. बच्चे के संज्ञानात्मक विकास हेतु उत्तम स्थान है— विद्यालय एवं कक्षा का वातावरण
209. मानसिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक हैं— वंशानुक्रम, परिवार का वातावरण, परिवार की सामाजिक स्थिति
210. बच्चों के संवेगात्मक विकास को प्रभावित करने वाले कारक है— स्वास्थ्य एवं शारीरिक विकास, पारिवारिक वातावरण और आपसी संबंध, पास-पड़ोस, समुदाय और समाज
211. एक शिक्षक विद्यार्थियों को समझाते हैं कि उन्हें दूसरों के दृष्टिकोण से उत्तेजित नहीं होना चाहिए भले ही उनके दृष्टिकोण स्वयं से विपरीत क्यों न हों। वह विद्यार्थियों के जिस पक्ष पर ध्यान दे रहा है— संवेगात्मक विकास
212. भावनात्मक लगाव को दर्शाता है— अलग होने की घबराहट
213. बच्चे के संवेगात्मक विकास को सबसे कम प्रभावित करने वाला है— खेलकूद
214. संवेगात्मक विकास को प्रभावित करने कारक हैं— शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक योग्यता, थकान
215. पूर्व बाल्यावस्था में बालक के संवेगात्मक विकास हेतु सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका होती है— माता-पिता की
216. “कोई भी नाराज हो सकता है- यह आसान है, परन्तु एक सही व्यक्ति के ऊपर, सही मात्रा में, सही समय पर सही उद्देश्य के लिए तथा सही तरीके से नाराज होना आसान नहीं है।” यह सम्बन्धित है— संवेगात्मक विकास से
217. खेल के माध्यम से बालक अपने संवेगों पर नियंत्रण करना सीख जाता है तो यह विकास कहलाता है— संवेगात्मक विकास
218. वह परिस्थिति जिसमें बच्चे का संवेगात्मक एवं सामाजिक विकास अच्छे से होगा— जब बच्चे को महत्त्वपूर्ण माना जाए, उसकी भावनाओं का सम्मान किया जाए
219. व्यापक वफादारी, दया भावना में वृद्धि व मानसिक स्थिति में उतार-चढ़ाव संबंधित है— संवेगात्मक विकास की विशेषताओं से
220. बच्चों के संवेगात्मक विकास के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है— कक्षा-कक्ष का प्रजातांत्रिक परिवेश
221. बालक में नैतिक मूल्यों के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है— प्रार्थना सभा, सही सामाजिकरण, बुद्धि
222. विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों का विकास महत्त्वपूर्ण होता है। हम इस विकास के लिये करना चाहेंगे— स्वयं को आदर्श के रूप में प्रस्तुत करना
223. बच्चों में नैतिकता की स्थापना के लिए सर्वोत्तम मार्ग है— शिक्षक का आदर्श रूप में व्यवहार करना
224. छात्रों में अच्छे नागरिक के गुण, समाहित करने का तरीका होना चाहिए— उन्हें राष्ट्रीय नायकों से परिचित कराकर
225. बच्चों के अच्छे चरित्र निर्माण के लिए— कक्षा-कक्ष गतिविधि इस प्रकार से हो कि बच्चों को चरित्र निर्माण में सहायता मिल सके
226. चरित्र का विकास होता है— इच्छाशक्ति द्वारा, बर्ताव एवं व्यवहार द्वारा, नैतिकता द्वारा
227. सही और गलत की समझ होना, ये ………. विकास का हिस्सा है।— नैतिक
228. सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ अधिकतर संबंधित हैं— छात्रों के सर्वांगीण विकास से
229. विद्यालयों में सह-पाठ्येत्तर गतिविधियाँ आयोजित की जानी चाहिए, क्योंकि— ये छात्र के समग्र विकास में सहायक है
230. निचली कक्षाओं में शिक्षण की खेल-पद्धति मूल रूप से आधारित है— विकास एवं वृद्धि के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर
231. एक बच्चा अपनी मातृभाषा सीख रहा है व दूसरा बच्चा वही भाषा द्वितीय भाषा के रूप में सीख रहा है। दोनों समान प्रकार की त्रुटि कर सकते हैं— विकासात्मक
232. विकास एवं अधिगम के बीच संबंध को सही तरीके से सूचित करता है— विकास एवं अधिगम अंतःसंबंधित और अंतःनिर्भर होते हैं
233. यदि छात्र अधिकांश कार्य स्वयं के हाथों से करेगा, तो छात्र में— आत्मनिर्भरता पैदा होती है
234. शिक्षण का विकासात्मक परिप्रेक्ष्य शिक्षकों से यह माँग करता है कि वे— विकासात्मक कारकों के ज्ञान के अनुसार अनुदेशन युक्तियों का अनुकूलन करें
235. एक शिक्षिका को बच्चों को अपने आप से बात करने (व्यक्तिगत वाक्) को प्रतिक्रिया देनी चाहिए— उसे प्रोत्साहित करना चाहिए क्योंकि इससे स्व-नियमन सुसाधित होता है
236. 1.5 से 2.5 साल की उम्र के बच्चों द्वारा अक्सर उच्चरित ‘द्वि-शब्दीय’ उच्चारणों को कहा जाता है— तारप्रेषित वाचन
237. एफ.जी. फ्रेंच मेथड का प्रयोग ………… की शिक्षा देने के लिए किया जाता है।— लिखने
238. गहन पढ़ाई से छात्रों के किस प्रकार के शब्द-संग्रह में बढ़ोतरी होती है— सक्रिय
239. एक अध्यापिका अपने विद्यार्थियों को गणित के सवालों के उत्तर तक पहुँचने की प्रक्रिया को व्याख्या करने के लिए बढ़ावा देती है— अधिसंज्ञानात्मक कौशल के विकास में मददगार है
240. बाल्यावस्था की प्रमुख मनोवैज्ञानिक विशेषता है— सामूहिकता की भावना
241. खिलौने की आयु कहा जाता है— पूर्व बाल्यावस्था
242. विकास का अर्थ है— परिपक्वता एवं अनुभव के फलस्वरूप होने वाले परिवर्तनों की श्रृंखला
243. बचपन के साम्प्रतिक दृष्टिकोण की मान्यता है— बचपन वृद्धि एवं परिवर्तन की अनूठी अवधि है
244. एक असामान्य 12 वर्ष के बच्चे में सबसे अधिक होना सम्भव है— समकक्षी के अनुमोदन के लिए बेचैनी
245. मनोविज्ञान के अनुसार बाल विकास की सबसे जटिल अवस्था है— किशोरावस्था
246. वह अवस्था जिसमें शर्म तथा गर्व जैसी भावना का विकास होता है— बाल्यावस्था
247. तनाव और क्रोध की अवस्था है— किशोरावस्था
248. किशोर अनुभव कर सकते हैं— दुश्चिन्ता और स्वयं से सरोकार का
249. मिश्रित आयु वर्ग वाले विद्यार्थियों की कक्षा से व्यवहार रखने वाले शिक्षक के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है— विकासात्मक अवस्थाओं का ज्ञान
250. मानव विकास की वह अवस्था जिसे “सुनहरी अवस्था” कहा जाता है— बाल्यावस्था
251. प्रारम्भिक बाल्यावस्था के दौरान उन भूमिकाओं एवं व्यवहारों के विषय में जानकारी प्रदान करते हैं जो एक समूह में स्वीकार्य हैं— माता-पिता एवं भाई-बहन
252. विकास और अधिगम के बीच सम्बन्ध को सर्वश्रेष्ठ रूप से जोड़ता है— अधिगम और विकास एक जटिल तरीके से अन्तः सम्बन्धित हैं
253. विकास की किस …………. में बुद्धि का अधिकतम विकास होता है।— किशोरावस्था
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