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Tez Education – शिक्षक पात्रता परीक्षा (MP TET)
10 Nov. 2024 | Shift-1 | विषय:- हिन्दी
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निर्देश: काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए
मेघ आए बड़े बन ठन के सँवर के।
आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली,
दरवाजे खिड़कियाँ खुलने लगी गली गली।
पाहुन ज्यों आए हो, गाँव में शहर के।
मेघ आए बड़े बन ठन के सँवर के।
पेड़ झुक झाँकने लगे, गरदन अचकाए,
आँधी चली धूल भागी घाघरा उठाए,
बाँकी चितवन उठा, नदी ठिठकी, घूँघट सरके।
मेघ आए बड़े बन ठन के सँवर के।।
बूढ़े पीपल ने आगे बढ़कर जुहार की,
बरस बाद सुधि लीन्हीं –
बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की,
हरसाय ताल लाया, पानी परात भर के।
मेघ आए बड़े बन ठन के सँवर के।।
निर्देश: गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए
परमहंस रामकृष्ण ने साधनापूर्वक धर्म की जो अनुभूति प्राप्त की थी, स्वामी विवेकानन्द ने उनसे व्यावहारिक सिद्धांत निकाले। देश में बौद्धिकता के साथ नास्तिकता का प्रचार बढ़ता जा रहा था, किंतु रामकृष्ण को इसकी भी चिंता नहीं थी। वस्तुतः संसार से उन्हें कोई प्रयोजन नहीं था। वे आत्मानंद की खोज में थे एवं आनंद का सबसे सुगम मार्ग उन्हें यह दिखाई पड़ा था कि अपने आप को वे काली की कृपा के भरोसे छोड़ दें। उनका सारा जीवन प्रकृति के निश्छल पुत्र का जीवन था। वे अदृश्य सत्ता के हाथ में एक ऐसा यंत्र बन गए थे जिसमें कालिमा नहीं थी, मैल नहीं था, अतएव जिसके भीतर से अदृश्य अपनी लीला का चमत्कार अनायास दिखा सकता था। बहुत दिनों से हिंदुओं का विश्वास रहा है कि हृदय के पूर्ण रूप से निर्मल हो जाने पर, मन के स्वार्थ की सारी गंध निकल जाने पर एवं चित्त में छल की छाया भी नहीं रहने पर मनुष्य की सहज वृत्ति पूर्ण रूप से जाग्रत हो जाती है। तब धर्म की अनुभूतियाँ उसके भीतर, आप से आप जागने लगती हैं। रामकृष्ण के जीवन में यह सत्य साकार हो उठा था। अतएव धर्म की सारी उपलब्धियाँ उन्हें अपने आप प्राप्त हो गई। उन उपलब्धियों के प्रकाश में विवेकानन्द ने भारत और समग्र विश्व की समस्याओं पर विचार किया एवं उनके जो समाधान उन्होंने उपस्थित किए, वे असल में, रामकृष्ण के ही दिए हुए समाधान हैं। रामकृष्ण और विवेकानन्द एक ही जीवन के दो अंश, एक ही सत्य के दो पक्ष हैं।
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