EVS Pedagogy E-Notes Part-4
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पर्यावरण अध्ययन (EVS)
महत्वपूर्ण वन-लाइनर शिक्षण शास्त्र (Pedagogy)
सामाजिक असमानताओं पर अधिक बल देने के लिए प्रभावी अधिगम अनुभव होगा—
विद्यार्थियों से समूह परियोजनाओं का भार अपने ऊपर लेने के लिए कहना।
पाठ्य-पुस्तकों में ‘करके देखो’ खंड का उद्देश्य है—
प्रत्यक्ष हस्तपरक अनुभव उपलब्ध कराना।
EVS में एक अच्छे दत्त कार्य (Assignment) का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए—
अधिगम-विस्तार के अवसर उपलब्ध कराना।
चिड़ियाघर के भ्रमण के आयोजन का मुख्य उद्देश्य है—
शिक्षार्थियों को सक्रिय अधिगम अनुभव उपलब्ध कराना।
गरीबी, निरक्षरता और वर्ग असमानता जैसे मुद्दों पर प्रभावी अधिगम—
संबंधित जानकारी एकत्र करने और विश्लेषण के लिए सामूहिक परियोजना।
NCF 2005 के अनुसार प्राथमिक स्तर पर EVS शिक्षण का प्रमुख उद्देश्य—
कक्षा कक्षीय अधिगम को विद्यालय के बाहर के जीवन से जोड़ना।
प्राथमिक स्तर पर पाठ्यचर्या की आवश्यकता के अनुरूप नहीं है—
उसे काम की दुनिया में प्रवेश के लिए शिक्षार्थियों को ज्ञान एवं कौशल से लैस करना।
पाठ्य-पुस्तकों में कविताओं और कहानियों को शामिल करने का उद्देश्य—
नित्य और एकरस विषय-वस्तु में बदलाव करना (तथा कल्पनाशीलता बढ़ाना)।
अच्छी पाठ्यचर्या ‘बच्चे, जीवन और विषय के प्रति सही’ होनी चाहिए। यह शर्त पूरी नहीं करती यदि—
वह शब्दावली और परिभाषाओं पर अधिक बल देती है।
‘खाना जो हमें खाना चाहिए’ संकल्पना के लिए सक्रिय अधिगम—
शिक्षार्थियों से सभी संभावित स्रोतों से संबंधित जानकारी एकत्र करने को कहना।
‘हवा सब जगह है’ प्रकरण पढ़ाने के लिए योजना—
शिक्षार्थियों को क्षेत्र-भ्रमण पर ले जाना।
कविताओं और कहानी-कथन का प्रयोग सहायता करता है—
स्थानीय एवं वैश्विक स्तर पर संसार की प्रकृति को खोजने और कल्पना करने की योग्यता में।
सीमा रटकर सीखती है, लीना समझकर सीखती है। यह संकेत है—
वैयक्तिक भिन्नताओं (Individual Differences) का।
अभ्यास एवं गतिविधियों को उपलब्ध कराना चाहिए—
प्रकरणों (Topics) में अंतः निर्मित।
पर्यावरण अध्ययन के शिक्षकों को ध्यान देना चाहिए—
विशेषतः प्रयोगों पर।
विज्ञान प्रदर्शिनी का सर्वाधिक उपयुक्त उद्देश्य है—
शिक्षार्थियों के लिए सृजनात्मक माध्यम उपलब्ध कराना।
श्यामा का निष्पादन सर्वश्रेष्ठ है, वह सृजनात्मक है। वह सीखती है—
अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) के द्वारा।
समूह चर्चा, समूह-परियोजना जैसी गतिविधियाँ दर्शाती हैं—
सामाजिक गतिविधि के रूप में सीखना।
शैक्षिक भ्रमण के दौरान बच्चों से अपेक्षाएँ—
ध्यान से अवलोकन करना, टिप्पणियाँ दर्ज करना और साथियों/शिक्षक के साथ बाँटना।
पहेलियाँ शामिल करने का उद्देश्य नहीं है—
बच्चों के मस्तिष्क को भ्रमित करना।
शैक्षणिक भ्रमण का मूल उद्देश्य है—
छात्रों के लिए प्रत्यक्ष अनुभव (Direct Experience)।
प्राथमिक स्तर पर खेलविधि आधारित है—
शिक्षण विधि के सिद्धान्त पर।
बच्चा दत्त-कार्य (Assignment) जमा नहीं कराता। सुधारात्मक उपाय—
अनियमितता के कारण पता करना और बच्चे को परामर्श देना।
खाद्य श्रृंखला (Food Chain) की संकल्पना पढ़ाने के लिए सबसे प्रभावी व्यूह रचना—
जीवों के प्ले-कार्ड्स बनाना और समूहों को उन्हें व्यवस्थित करने के लिए कहना।
रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण सहायता करेगा—
कक्षीय अधिगम को वास्तविक जीवन-स्थितियों के साथ जोड़ने में।
‘पोषण’ प्रकरण का प्रभावी परिचय—
विद्यार्थियों को टिफिन बॉक्स खोलने, सामग्री देखने को कहना, फिर व्याख्या करना।
सन्तुलित प्रश्न-पत्र बनाने का सही चरण—
डिजाइन → ब्लूप्रिन्ट → प्रश्न लिखना → सम्पादन करना।
‘बीज अंकुरण’ की अवधारणा का बेहतर शिक्षण—
बीज बोने, अंकुरण के चरणों का अवलोकन और चित्र बनाने की गतिविधि द्वारा।
बच्चों के व्यक्तिगत अनुभवों को महत्व देने का लाभ—
विषय को बच्चों के अनुभव-संसार से जोड़ने और विमर्श/सीखने को बढ़ावा देने में।
सरल प्रयोग और निर्देशन किए जा सकते हैं—
बच्चों को स्वयं सीखने के योग्य बनाने और अवलोकन कौशलों को पैना करने के लिए।
🌿 पर्यावरण अध्ययन (EVS)
शिक्षण शास्त्र एवं महत्वपूर्ण तथ्य – “वन-लाइनर नोट्स”
बुनियादी शिक्षण अवधारणाएँ
सह-सम्बन्ध: प्रभावी शिक्षण तब होता है जब शिक्षक बच्चों के पुराने ज्ञान को नई संकल्पना से जोड़ता है।
बाहरी दुनिया: प्राथमिक विद्यालय में EVS पढ़ाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों के अनुभवों को बाहरी दुनिया से जोड़ना है।
जीन पियाजे: “बच्चे दुनिया के बारे में अपनी समझ का सृजन स्वयं करते हैं” – यह प्रसिद्ध कथन पियाजे का है।
NCF-2005 एवं पाठ्यक्रम
6 थीम्स: NCF-2005 ने कक्षा 3 से 5 तक के पर्यावरण अध्ययन को 6 प्रमुख थीमों में बाँटा है।
यात्रा थीम: ऐतिहासिक इमारतों, धातुओं के प्रयोग और डिज़ाइन की चर्चा ‘यात्रा’ (Travel) थीम के अंतर्गत आती है।
वर्जित: शब्दावली, परिभाषाओं का बोझ डालना और सौरमंडल (NCF अनुसार) प्राथमिक स्तर की विषय वस्तु नहीं है।
शिक्षण रणनीतियाँ एवं कौशल
सम्प्रेषण कौशल: डायरी लिखने, मौसम दर्ज करने और प्रश्न पूछने से बच्चों में सम्प्रेषण कौशल का विकास होता है।
अवलोकन: पौधों के विभिन्न भागों को पढ़ाने के लिए सबसे आवश्यक ‘पौधों का प्रत्यक्ष अवलोकन’ है।
स्वस्थ स्पर्धा: सामाजिक भावना के विकास हेतु बच्चों को स्वस्थ स्पर्धा (Healthy Competition) के लिए तैयार करना सर्वोत्तम प्रयास है।
शिक्षण सिद्धांत एवं विधियाँ
🔎 प्रमुख विधियाँ
- 🎯 प्रोजेक्ट विधि: जन्मदाता – किल पैट्रिक
- 🚶 भ्रमण विधि: वास्तविक जीवन की स्थितियों से जोड़ती है।
- 🤝 सहयोगात्मक अध्ययन: सामाजिक कुरीतियों और प्रदूषण पढ़ाने हेतु उपयुक्त।
- 🔄 आवृत्ति का सिद्धांत: अर्जित ज्ञान को स्थायी बनाने के लिए आवश्यक।
📐 शिक्षण सूत्र
- 🌟 प्रत्यक्ष से अप्रत्यक्ष: ग्रहों को पढ़ाने से पहले तारों/सूर्य को पढ़ाना।
- ❌ अंश से पूर्ण: अधिगम को सफल बनाने के लिए इस सूत्र का प्रयोग (प्रारंभ में) नहीं करना चाहिए।
- 👤 वैयक्तिक भिन्नता: अलग-अलग पद्धतियों का प्रयोग इसी सिद्धांत का अनुसरण है।
विशेष तथ्य
एलिस क्रो: सफल शिक्षण हेतु मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों का प्रयोग अनिवार्य है।
स्टीवेसन: “योजना एक सकारात्मक कार्य है, जो स्वाभाविक परिस्थितियों में पूर्ण होता है।”
रूसो: शिक्षा के क्षेत्र में सर्वप्रथम ‘क्रियाकलाप’ का विचार प्रस्तुत किया।
सेमिनार: इसमें अधिगमकर्ता (Learner) की भूमिका मुख्य होती है।
क्विक चेकलिस्ट
✓ रटने को बढ़ावा देने वाली विधि: निगमन विधि
✓ बागवानी अनिवार्य है: सौन्दर्याकरण के लिए
✓ भ्रमण स्थल का हिस्सा नहीं: कक्षा-कक्ष
✓ विचार-विमर्श का आधार: लोकतान्त्रिक सिद्धांत