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मध्य प्रदेश के सांची में महान स्तूप का निर्माण मूल रूप से किस शताब्दी में किया गया था?
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✓ सही उत्तर:
C. तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व
💡 व्याख्या:
सांची के महान स्तूप (स्तूप संख्या-1) का निर्माण मूल रूप से मौर्य सम्राट अशोक द्वारा तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व (3rd Century BC) में करवाया गया था। शुंग काल में इसे पाषाण वेष्टनी (रेलिंग) और आंध्र सातवाहन काल में इसके चारों भव्य तोरण द्वार (प्रवेश द्वार) निर्मित किए गए थे। वर्ष 1989 में यूनेस्को ने सांची को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।
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मध्य प्रदेश के साँची में महान स्तूप के प्रवेशद्वारों पर की गई नक्काशी दर्शाती है:
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✓ सही उत्तर:
C. बुद्ध के जीवन के दृश्य
💡 व्याख्या:
सांची के महान स्तूप के चारों तोरण द्वारों पर भगवान बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाओं (जन्म, महाभिनिष्क्रमण, ज्ञान प्राप्ति, धर्मचक्रप्रवर्तन और महापरिनिर्वाण) तथा जातक कथाओं के विभिन्न प्रसंगों को अत्यंत सूक्ष्म एवं सुंदर नक्काशी के माध्यम से उकेरा गया है।
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मध्य प्रदेश के सांची स्थित अशोक स्तंभ का क्या महत्व है?
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✓ सही उत्तर:
C. इसमें भारत के राष्ट्रीय प्रतीक चार सिंहों को दर्शाया गया है।
💡 व्याख्या:
सांची में स्थित अशोक स्तंभ के शीर्ष पर चार सिंह पीठ से पीठ सटाए बैठे हुए हैं, जो कि सारनाथ के सिंह शीर्ष (भारत का राष्ट्रीय प्रतीक) के समान ही उत्कृष्ट मौर्यकालीन पाषाण स्थापत्य का उदाहरण है। यह स्तंभ सम्राट अशोक द्वारा तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में स्थापित किया गया था।
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सांची स्तूप मुख्य रूप से किस वास्तुकला शैली का प्रतिनिधित्व करता है?
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✓ सही उत्तर:
C. बौद्ध स्तूप वास्तुकला
💡 व्याख्या:
सांची का स्तूप शास्त्रीय बौद्ध स्तूप वास्तुकला (Buddhist Stupa Architecture) का सर्वोत्कृष्ट और सबसे सुरक्षित उदाहरण है। इसमें अर्धगोलाकार गुंबद (अंड), हर्मिका, यष्टि, छत्र, प्रदक्षिणा पथ और अलंकृत तोरण द्वार शामिल हैं।
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मध्य प्रदेश के सांची में महान स्तूप के अलावा कौन-से अन्य स्तूप ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण हैं?
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✓ सही उत्तर:
C. स्तूप संख्या 2 और 3
💡 व्याख्या:
सांची में महान स्तूप (स्तूप-1) के अतिरिक्त स्तूप संख्या 2 और स्तूप संख्या 3 ऐतिहासिक व पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। स्तूप संख्या 3 में भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों—सारिपुत्र और महामौद्गल्यायन की अस्थि धातुएं (पवित्र अवशेष) रखी गई थीं। स्तूप संख्या 2 में बौद्ध आचार्यों के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
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निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारतीय वास्तुकला में तोरण के विकास का सही वर्णन करता है?
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✓ सही उत्तर:
B. यह प्रारंभिक स्तूपों में एक कार्यात्मक लकड़ी के द्वार के रूप में उत्पन्न हुआ, बाद में पत्थर में (जैसे साँची) प्रतिरूपित किया गया और इसके सजावटी तत्व (जैसे चंद्रशाला) अंततः मंदिर की दीवारों पर स्वतंत्र स्थापत्य अलंकरण के रूप में प्रयुक्त हुए।
💡 व्याख्या:
भारतीय स्थापत्य कला में तोरण की शुरुआत प्रारंभिक स्तूपों में काष्ठ (लकड़ी) के प्रवेश द्वारों से हुई थी। शुंग और सातवाहन काल में इसे सांची और भरहुत में पत्थरों से तराशा गया (काष्ठ कला का पाषाण में अनुकरण)। आगे चलकर इसके सजावटी रूपांकन जैसे चंद्रशाला (चैत्य गवाक्ष) हिंदू मंदिर वास्तुकला में दीवारों, द्वारों और शिखरों पर प्रमुख स्वतंत्र अलंकरण बने।
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बुद्ध से संबंधित किसी घटना से नहीं जुड़ा हुआ स्तूप स्थल कौन-सा है?
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✓ सही उत्तर:
B. साँची
💡 व्याख्या:
सांची का प्रत्यक्ष संबंध भगवान बुद्ध के जीवन की किसी प्रत्यक्ष ऐतिहासिक घटना से नहीं रहा है (भगवान बुद्ध अपने जीवनकाल में कभी सांची नहीं आए थे)। जबकि सारनाथ में बुद्ध ने प्रथम उपदेश (धर्मचक्रप्रवर्तन) दिया, बोधगया में ज्ञान प्राप्ति हुई और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण प्राप्त हुआ था।
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किसके शासनकाल में मध्य प्रदेश के इंदौर में केंद्रीय संग्रहालय शुरू में एम. जी. रोड पर स्थित था?
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✓ सही उत्तर:
C. तुकोजी राव तृतीय
💡 व्याख्या:
इंदौर के केंद्रीय संग्रहालय की स्थापना शुरुआत में वर्ष 1923 में होल्कर नरेश महाराजा तुकोजी राव तृतीय के शासनकाल में एम. जी. रोड स्थित ‘नररत्न मंदिर’ के रूप में की गई थी। बाद में वर्ष 1965 में इसे वर्तमान नवरत्न बाग (जीपीओ के पास) परिसर में स्थानांतरित किया गया।
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इंदौर मध्य प्रदेश का कांच मंदिर किसने बनवाया?
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✓ सही उत्तर:
B. सेठ हुकुमचंद
💡 व्याख्या:
इंदौर का प्रसिद्ध दिगंबर जैन ‘कांच मंदिर’ भारत के प्रख्यात उद्योगपति और दानवीर ‘सर सेठ हुकुमचंद’ (कासलीवाल) द्वारा 20वीं शताब्दी के आरंभ में बनवाया गया था। इस मंदिर की दीवारों, स्तंभों, छतों और फर्श को बेल्जियम से मंगाए गए बहुरंगी कांच व दर्पणों से अत्यंत कलात्मक ढंग से सजाया गया है।
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मध्य प्रदेश के इंदौर में लालबाग पैलेस किस शाही वंश से संबंधित था?
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✓ सही उत्तर:
C. होल्कर राजवंश
💡 व्याख्या:
लालबाग पैलेस इंदौर के होल्कर राजवंश से संबंधित ऐतिहासिक एवं आलीशान महल है। इसका निर्माण कार्य महाराजा शिवाजीराव होल्कर द्वारा वर्ष 1886 में प्रारंभ करवाया गया था और इसे महाराजा तुकोजीराव तृतीय द्वारा 1921 में पूर्ण करवाया गया।
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मध्य प्रदेश के इंदौर में केंद्रीय संग्रहालय पहली बार कब स्थापित किया गया था?
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✓ सही उत्तर:
B. 1923
💡 व्याख्या:
इंदौर के केंद्रीय संग्रहालय की नींव वर्ष 1923 में एक संस्था ‘नररत्न मंदिर’ के रूप में रखी गई थी। वर्ष 1929 में इसे एक विधिवत प्रांतीय संग्रहालय के रूप में पुनर्गठित किया गया तथा वर्ष 1965 में इसे इसके वर्तमान भव्य भवन में स्थानांतरित किया गया।
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उस शैक्षणिक संस्थान का मूल नाम क्या था जहाँ मध्य प्रदेश के इंदौर का केंद्रीय संग्रहालय पहली बार स्थापित किया गया था?
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✓ सही उत्तर:
B. नररत्न मंदिर
💡 व्याख्या:
इंदौर के केंद्रीय संग्रहालय की स्थापना मूल रूप से वर्ष 1923 में ‘नररत्न मंदिर’ (Nararatna Mandir) के नाम से की गई थी। इसका उद्देश्य मालवा क्षेत्र की ऐतिहासिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासतों को संजोना और प्रदर्शित करना था।
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मध्य प्रदेश के इंदौर परिसर में लालबाग पैलेस कितने एकड़ में फैला है?
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✓ सही उत्तर:
C. 71.63 एकड़
💡 व्याख्या:
इंदौर में खान (कान्ह) नदी के तट पर स्थित लालबाग पैलेस का भव्य परिसर लगभग 71.63 एकड़ (लगभग 72 एकड़) के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें सुंदर बगीचे, दुर्लभ पेड़-पौधे और प्रसिद्ध रोज गार्डन भी शामिल हैं।
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लालबाग पैलेस, इंदौर, मध्य प्रदेश किस स्थापत्य शैली को दर्शाता है?
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✓ सही उत्तर:
C. यूरोपीय
💡 व्याख्या:
लालबाग पैलेस पश्चिमी/यूरोपीय स्थापत्य शैली (विशेषकर इतालवी पुनर्जागरण, बरोक और रोकोको शैलियों) का बेजोड़ उदाहरण है। इसके प्रवेश द्वार का डिज़ाइन लंदन के बकिंघम पैलेस के भव्य मुख्य द्वार से प्रेरित है और इसे इंग्लैंड में ही तैयार करवाया गया था।
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मध्य प्रदेश के ______ महल को स्विंग पैलेस के नाम से जाना जाता है।
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✓ सही उत्तर:
A. हिंडोला
💡 व्याख्या:
मांडू (धार जिला) में स्थित ‘हिंडोला महल’ (Hindola Mahal) को अंग्रेजी में ‘स्विंग पैलेस’ (Swing Palace) कहा जाता है। इसकी विशाल पार्श्व दीवारें लगभग 77 डिग्री के कोण पर बाहर की ओर झुकी हुई हैं, जिससे दूर से देखने पर यह झूलते हुए महल जैसा आभास देता है। इसका निर्माण मालवा सल्तनत के सुल्तान गयासुद्दीन खिलजी के काल में हुआ था।
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मध्य प्रदेश के भोपाल में बिड़ला मंदिर कहाँ स्थित है?
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✓ सही उत्तर:
B. अरेरा पहाड़ी की सबसे ऊँची चोटी
💡 व्याख्या:
भोपाल का प्रसिद्ध बिड़ला मंदिर (लक्ष्मी नारायण मंदिर) अरेरा हिल्स (Arera Hills) की सबसे ऊँची चोटी पर स्थित है। इस पावन स्थल से पूरे भोपाल शहर और झीलों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। इस मंदिर के निकट एक समृद्ध पुरातात्विक संग्रहालय भी स्थित है।
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इतिहासकारों के अनुसार, मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में गुप्त काल तक किस वास्तुशिल्प विशेषता का अभाव था?
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✓ सही उत्तर:
C. शिखर
💡 व्याख्या:
प्रारंभिक गुप्तकालीन हिंदू मंदिर वास्तुकला में सपाट छत वाले मंदिरों का निर्माण होता था, जिनमें ऊंचे शिखरों का अभाव था। शिखरों का प्रादुर्भाव गुप्त काल के उत्तरार्ध एवं मध्यकाल में नागर शैली के विकास के साथ हुआ। इसलिए इतिहासकारों के अनुसार महाकालेश्वर मंदिर में गुप्त काल तक शिखर अनुपस्थित था।
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मध्य प्रदेश के खजुराहो में स्थित चौंसठ योगिनी मंदिर के बारे में क्या सच है?
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✓ सही उत्तर:
C. यह 10वीं शताब्दी का मंदिर है जो देवी दुर्गा को समर्पित है
💡 व्याख्या:
खजुराहो का चौंसठ योगिनी मंदिर खजुराहो समूह का सबसे प्राचीनतम मंदिर है (9वीं-10वीं शताब्दी, चंदेल काल)। यह ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित एक खुला आयताकार मंदिर है, जो शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा (महिषासुरमर्दिनी) तथा उनकी 64 योगिनियों को समर्पित है।
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प्रसिद्ध ‘खजुराहो मंदिर’ किस मंदिर वास्तुकला शैली का उदाहरण हैं?
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✓ सही उत्तर:
C. नागर
💡 व्याख्या:
खजुराहो के भव्य मंदिर उत्तर भारतीय मंदिर वास्तुकला की ‘नागर शैली’ (विशेष रूप से चंदेल उप-शैली) के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इन मंदिरों में अधिष्ठान, गर्भगृह, अंतराल, महामंडप और पर्वत श्रृंखलाओं की भांति उठते हुए अलंकृत उरुशृंग युक्त शिखर प्रमुख विशेषताएं हैं।
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______ मध्य प्रदेश में एक लोकप्रिय बौद्ध तीर्थ स्थल है।
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✓ सही उत्तर:
A. सांची
💡 व्याख्या:
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित सांची विश्वप्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थल है। यहाँ सम्राट अशोक द्वारा निर्मित महान स्तूप सहित अनेक स्तूप, मठ एवं चैत्य स्थित हैं, जो देश-विदेश के बौद्ध अनुयायियों और पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं।
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निम्नलिखित में से कौन उज्जैन, मध्य प्रदेश में गुरु संदीपनि के शिष्य थे?
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✓ सही उत्तर:
C. भगवान कृष्ण
💡 व्याख्या:
उज्जैन (प्राचीन अवन्तिका) में स्थित महर्षि संदीपनि आश्रम में भगवान श्री कृष्ण, उनके बड़े भाई बलराम और उनके मित्र सुदामा ने वेदों, 64 कलाओं और 14 विद्याओं की समग्र शिक्षा प्राप्त की थी। यहाँ आज भी ‘अंकपात’ नामक स्थल स्थित है जहाँ भगवान कृष्ण ने अपनी स्लेट धोई थी।
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मध्य प्रदेश का खजुराहो निम्नलिखित में से किसके लिए प्रसिद्ध है?
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✓ सही उत्तर:
C. पुरातात्विक और ऐतिहासिक स्मारक, जिनमें चंदेल वंश द्वारा निर्मित मंदिर शामिल हैं
💡 व्याख्या:
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित खजुराहो अपने अद्वितीय कलात्मक और पुरातात्विक स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है। इन मंदिरों का निर्माण 950 से 1050 ईस्वी के मध्य चंदेल राजवंश के राजाओं द्वारा करवाया गया था। यह वर्ष 1986 से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल है।
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मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती अनुष्ठान में पहला चरण क्या है?
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✓ सही उत्तर:
C. शिवलिंग का अभिषेक (अनुष्ठान स्नान)
💡 व्याख्या:
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित होने वाली भस्म आरती का प्रथम एवं अनिवार्य चरण भगवान महाकाल के पावन ज्योतिर्लिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शर्करा) एवं पवित्र जल से ‘अभिषेक’ (अनुष्ठानिक स्नान) करना होता है।
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मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में शिवलिंग को स्नान के बाद कैसे सजाया जाता है?
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✓ सही उत्तर:
C. भस्म और श्रृंगार सामग्री के साथ
💡 व्याख्या:
अभिषेक एवं स्नान के पश्चात भगवान महाकाल का चंदन, भांग, अबीर, गुलाल, वस्त्र, आभूषण तथा सुगंधित द्रव्यों और भस्म के साथ अत्यंत आकर्षक एवं मनोहारी श्रृंगार किया जाता है।
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मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में प्रसिद्ध दैनिक अनुष्ठान का नाम क्या है?
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✓ सही उत्तर:
C. भस्म आरती
💡 व्याख्या:
उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की संपूर्ण विश्व में सबसे प्रसिद्ध और अनूठी दैनिक पूजा ‘भस्म आरती’ (Bhasma Aarti) है। यह प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त (सुबह लगभग 4:00 बजे) में संपन्न होती है, जिसमें भगवान शिव को ताजी भस्म अर्पित की जाती है।
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मध्य प्रदेश के उज्जैन में कौन-सा ज्योतिर्लिंग स्थित है, जो इसकी धार्मिक महत्ता में योगदान देता है?
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✓ सही उत्तर:
C. महाकालेश्वर
💡 व्याख्या:
भारत के द्वादश (12) ज्योतिर्लिंगों में से एक ‘श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग’ उज्जैन में पवित्र शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। यह समस्त ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र ‘दक्षिणमुखी’ ज्योतिर्लिंग है। मध्य प्रदेश में दूसरा ज्योतिर्लिंग खंडवा जिले के मांधाता द्वीप पर ‘ओंकारेश्वर’ है।
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भोपाल, मध्य प्रदेश में गौहर महल द्वारा कवर किया गया अनुमानित क्षेत्रफल कितना है?
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✓ सही उत्तर:
C. 4.65 एकड़
💡 व्याख्या:
भोपाल में बड़े तालाब के किनारे VIP रोड पर स्थित ऐतिहासिक गौहर महल का परिसर लगभग 4.65 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यह महल नवाब कुदसिया बेगम (गौहर बेगम) द्वारा निर्मित करवाया गया था।
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मध्य प्रदेश के भोपाल में गोहर महल का निर्माण किस काल में हुआ था?
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✓ सही उत्तर:
C. 1819-1837
💡 व्याख्या:
भोपाल की प्रथम महिला शासिका नवाब कुदसिया बेगम (उर्फ गौहर बेगम) का शासनकाल वर्ष 1819 से 1837 तक रहा। इसी समयावधि में (वर्ष 1820 के आसपास) उन्होंने अपनी रिहाइश और दरबार के रूप में गौहर महल का निर्माण करवाया था।
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मध्य प्रदेश के भोपाल में गौहर महल में कौन-सी स्थापत्य शैली का मिश्रण है?
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✓ सही उत्तर:
B. हिंदू और मुगल
💡 व्याख्या:
भोपाल का गौहर महल पारंपरिक हिंदू और मुगल (इस्लामी) स्थापत्य कला के सुंदर समन्वय का प्रतीक है। इसमें नक्काशीदार लकड़ी के खंभे, मेहराब, झरोखे और खुले आंगन दोनों संस्कृतियों की कला का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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यदि आप जल महोत्सव में भाग लेना चाहते हैं और हवाई यात्रा कर रहे हैं, तो मध्य प्रदेश में जल महोत्सव के सबसे निकटतम हवाई अड्डा कौन-सा है?
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✓ सही उत्तर:
C. इंदौर हवाई अड्डा
💡 व्याख्या:
खंडवा जिले में स्थित हनुवंतिया टापू (जल महोत्सव स्थल) के लिए निकटतम प्रमुख वाणिज्यिक एवं अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा इंदौर का ‘देवी अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा’ है, जो यहाँ से लगभग 150 किमी की दूरी पर स्थित है।
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मध्य प्रदेश में उज्जैन को ज्ञान का महान केंद्र क्यों कहा जाता है?
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✓ सही उत्तर:
B. यह प्राचीन विद्वानों और पौराणिक शिक्षा का केंद्र है
💡 व्याख्या:
उज्जैन (अवन्तिका) प्राचीन भारत का प्रमुख विद्या और ज्ञान केंद्र रहा है। यह महर्षि संदीपनि का आश्रम स्थल रहा है जहाँ भगवान कृष्ण ने शिक्षा पाई। इसके साथ ही खगोलशास्त्री वराहमिहिर, महाकवि कालिदास, बाणभट्ट और राजा विक्रमादित्य के नवरत्नों की यह कर्मस्थली रही है।
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मध्य प्रदेश में निमाड़ उत्सव का स्थल महेश्वर निम्नलिखित में से किसके लिए प्रसिद्ध है?
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✓ सही उत्तर:
A. साड़ियाँ और तीर्थ स्थल
💡 व्याख्या:
खरगोन जिले में नर्मदा तट पर स्थित महेश्वर अपनी विश्वप्रसिद्ध ‘महेश्वरी साड़ियों’ (हथकरघा उद्योग) तथा ऐतिहासिक धार्मिक घाटों, राजराजेश्वर मंदिर और अहिल्याबाई होल्कर के पावन तीर्थ स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर ‘निमाड़ उत्सव’ आयोजित होता है।
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मध्य प्रदेश में कमलापति महल कहाँ स्थित है?
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✓ सही उत्तर:
C. भोपाल
💡 व्याख्या:
रानी कमलापति महल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बड़े तालाब और छोटे तालाब के मध्य ‘कमला पार्क’ में स्थित है। इसका निर्माण 18वीं शताब्दी के आरंभ (1716 ईस्वी) में गोंड राजा निज़ाम शाह द्वारा अपनी महारानी रानी कमलापति के लिए करवाया गया था।
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मध्य प्रदेश में खंडवा और हनुवंतिया के बीच लगभग कितनी दूरी है?
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✓ सही उत्तर:
B. 50 किमी
💡 व्याख्या:
इंदिरा सागर बांध के बैकवाटर पर विकसित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ‘हनुवंतिया टापू’ खंडवा जिला मुख्यालय से लगभग 45 से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
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मध्य प्रदेश के भेड़ाघाट में संगमरमर की चट्टानें नाव की सवारी के दौरान जादुई क्यों लगती हैं?
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✓ सही उत्तर:
C. नदी के किनारे चलते समय वे आकार बदलते हुए दिखाई देते हैं
💡 व्याख्या:
जबलपुर के भेड़ाघाट में नर्मदा नदी के शांत जल में नौकायन करते समय प्रकाश के विभिन्न कोणों, नदी के घुमावों और प्राकृतिक नक्काशी के कारण संगमरमर की चट्टानें लगातार अपना रूप और आकार बदलती हुई प्रतीत होती हैं, जो अत्यंत जादुई और रोमांचक अनुभव प्रदान करती हैं।
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मध्य प्रदेश को एक आशाजनक पर्यटन स्थल क्या बनाता है?
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✓ सही उत्तर:
B. इसका केंद्रीय स्थान और समृद्ध विरासत स्थल
💡 व्याख्या:
मध्य प्रदेश भारत के ठीक मध्य में स्थित होने के कारण देश के सभी कोनों से सुगम आवागमन प्रदान करता है। साथ ही यहाँ खजुराहो, सांची, भीमबेटका जैसे यूनेस्को धरोहर स्थल, समृद्ध वन्यजीव अभयारण्य, ऐतिहासिक किले और विविध सांस्कृतिक विरासत इसे एक अत्यंत आशाजनक पर्यटन स्थल बनाते हैं।
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मध्य प्रदेश का कौन-सा शहर ‘सतपुड़ा की रानी’ कहलाता है?
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✓ सही उत्तर:
A. पचमढ़ी
💡 व्याख्या:
नर्मदापुरम (होशंगाबाद) जिले में स्थित पचमढ़ी मध्य प्रदेश का एकमात्र प्रमुख पर्वतीय स्थल (हिल स्टेशन) है। सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं की हरी-भरी वादियों, जलप्रपातों और गुफाओं से आच्छादित होने के कारण इसे ‘सतपुड़ा की रानी’ (Queen of Satpura) कहा जाता है। इसकी खोज कैप्टन जे. फोरसिथ ने की थी।
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मध्य प्रदेश पर्यटन दिवस हर वर्ष किस तिथि को मनाया जाता है?
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✓ सही उत्तर:
B. 24 मई
💡 व्याख्या:
मध्य प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने और राज्य की ऐतिहासिक-प्राकृतिक धरोहरों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 24 मई को ‘मध्य प्रदेश पर्यटन दिवस’ मनाया जाता है। राष्ट्रीय पर्यटन दिवस 25 जनवरी तथा विश्व पर्यटन दिवस 27 सितंबर को मनाया जाता है।
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मध्य प्रदेश एक प्रमुख पर्यटन आकर्षण क्यों बनता जा रहा है?
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✓ सही उत्तर:
B. इसके स्मारकों, वन्यजीव वन क्षेत्रों, केंद्रीय स्थान और पहुँच के कारण
💡 व्याख्या:
मध्य प्रदेश अपने ऐतिहासिक स्थापत्य स्मारकों, बाघों एवं वन्यजीवों से समृद्ध राष्ट्रीय उद्यानों (कान्हा, बांधवगढ़, पेंच आदि), भारत के मध्य में स्थित होने तथा बेहतर सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के कारण देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र बन गया है।
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मध्य प्रदेश के भेड़ाघाट में चांदनी रात में नाव की सवारी की अनोखी विशेषता क्या है?
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✓ सही उत्तर:
C. संगमरमर की चट्टानें चाँदी की तरह चमकती हैं
💡 व्याख्या:
जबलपुर स्थित भेड़ाघाट में शरद पूर्णिमा या चांदनी रात में नर्मदा नदी में नौकायन करने पर चंद्रमा की शीतल किरणें जब सफेद संगमरमर की चट्टानों पर पड़ती हैं, तो वे विशुद्ध चांदी के समान धवल एवं चमकदार प्रतीत होती हैं। यह दृश्य विश्वभर में विख्यात है।
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यदि यात्री मध्य प्रदेश में जल महोत्सव में भाग लेने के लिए रेल यात्रा करते हैं, तो वे आमतौर पर किस शहर में पहुँचते हैं?
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✓ सही उत्तर:
C. खंडवा
💡 व्याख्या:
जल महोत्सव (हनुवंतिया टापू) में भाग लेने के लिए रेल यात्रियों का सबसे सुगम और निकटतम रेलवे स्टेशन ‘खंडवा जंक्शन’ (Khandwa Junction) है, जहाँ से हनुवंतिया लगभग 50 किमी की दूरी पर स्थित है।
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मध्य प्रदेश में भेड़ाघाट किस प्राकृतिक विशेषता के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध है?
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✓ सही उत्तर:
B. नर्मदा नदी के किनारे संगमरमर की चट्टानें
💡 व्याख्या:
जबलपुर का भेड़ाघाट नर्मदा नदी के दोनों ओर स्थित 100 फीट से अधिक ऊंची सफेद एवं धूसर संगमरमर की चट्टानों (Marble Rocks) के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहाँ नर्मदा नदी संगमरमर की संकरी घाटी से होकर बहती है और धुआंधार जलप्रपात का निर्माण करती है।
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अमरकंटक, मध्य प्रदेश को लोकप्रिय रूप से किस नाम से जाना जाता है?
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✓ सही उत्तर:
C. तीर्थराज
💡 व्याख्या:
अनूपपुर जिले में मैकल पर्वत श्रृंखला पर स्थित अमरकंटक को सनातन धर्म में ‘तीर्थराज’ (सभी तीर्थों का राजा) की संज्ञा दी गई है। यह पावन स्थल मध्य प्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली नर्मदा नदी, सोन नदी और जोहिला नदी का उद्गम स्थल है।