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शिक्षक पात्रता परीक्षा वर्ग-3
24 Nov. 2024, Shift-2 | विषय: हिंदी
निर्देश: काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
पावस ऋतु थी, पर्वत प्रदेश,
पल पल परिवर्तित प्रकृति वेश।
मेखलाकार पर्वत अपार
अपने सहस्त्र दृग सुमन फाड़,
अवलोक रहा है बार-बार
नीचे जल में निज महाकार,
जिसके चरणों में पला ताल
दर्पण-सा फैला है विशाल।
गिरि का गौरव गाकर झर-झर,
मद में नस नस उत्तेजित कर,
मोती की लड़ियों से सुंदर
झरते हैं झाग-भरे निर्झर।
गिरिवर के उर से उठ उठकर
उच्चाकांक्षाओं से तरुवर
हैं झाँक रहे नीरव नभ पर
अनिमेष, अटल, कुछ चिन्तातुर।
निर्देश: गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
आम से मनुष्य का परिचय बहुत पुराना है। लगभग 6,000 वर्षों से इसके बगीचे लगाए जा रहे हैं। मोहनजोदड़ो तथा हड़प्पा से प्राप्त कलात्मक नमूनों में आम जैसे फल की आकृति मिली है। राजा अशोक ने फल देने वाले छायादार वृक्षों में इसे सर्वप्रथम चुना था। अबुलफजल की ‘आइने-अकबरी’ के अनुसार, अकबर को आम इतने पसंद थे कि उसने दरभंगा में विभिन्न जातियों के आम एक बड़े बाग में लगवाए, जो लाखी बाग के नाम से जाना जाता था और भारत के सबसे बड़े आम्रकुंजों में से एक था। आम को संस्कृत में आम्र, सहकार, रसाल आदि कहा जाता है। इसका वानस्पतिक नाम ‘मेंगिफेरा इंडिका’ है। इसके मूल स्थान भारत, म्यांमार और थाइलैंड हैं। आम की अनेक जातियाँ व उपजातियाँ मिलती हैं। उन्हीं के अनुसार इसके असंख्य नाम हैं। आमों की किस्म का नामकरण उसके रूप, रंग, आकार, स्वाद, गंध आदि पर किया गया है। दशहरी, लंगड़ा, हापुस, चौसा आदि इसकी प्रसिद्ध किस्में हैं। भारत में आम हिमालय की तलहटी से लेकर समुद्री तटों तक होता है। यह पथरीली भूमि पर तथा उर्वर मैदानों में सर्वत्र उगता, पनपता और फूलता है। समुद्र की सतह से 1,000 मीटर की ऊंचाई तक आम के वृक्ष उगते हैं।