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Topic:- आकलन, मूल्यांकन
(By- Tez Education)
1. शिक्षा मनोविज्ञान में नामित मापनी स्तर के मापन का न्यूनतम प्रयोग किया जाता है।
2. एक बहु-सांस्कृतिक कक्षा-कक्ष में एक अध्यापिका सुनिश्चित करेगी कि आकलन में अपने विद्यार्थियों की सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि सम्मिलित हो।
3. वह प्रश्न जो विश्लेषण व मूल्यांकन जैसी उच्चतर संज्ञानात्मक कौशल का आकलन करता है- अपने क्षेत्र में आप निजी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के बीच क्या अंतर पाते हैं और क्यों।
4. मूल्यांकन, शिक्षक के लिए जिस रूप में सहायक है- यह क्रिया शोध हेतु नये मार्ग खोलता है, शिक्षक अपने छात्रों को विभिन्न समूहों में वर्गीकृत कर सकता है, शिक्षक अपने छात्रों को तत्काल प्रतिपुष्टि दे सकता है।
5. मूल्यांकन एक सृजनात्मक चिंतन की अवस्था है।
6. मूल्यांकन में केवल गुणात्मक अंकन और केवल मात्रात्मक अंकन सम्मिलित होता है।
7. वह कार्य विधि (ऑपरेशन) जो हमें जानकारी को मान्य करने में मदद करती है- मूल्यांकन।
8. शिक्षण कार्य का आकलन व मूल्यांकन करने के लिये सबसे छोटी शर्त जाँच (टेस्ट) है।
9. मापन की सर्वाधिक विश्वसनीय मापनी अनुपात है।
10. वह मापनी जिसमें अन्तराल के समस्त गुण के साथ परम शून्य भी हो, अनुपात मापनी कहलाती है।
11. मूल्यांकन एक सतत् प्रक्रिया है, जिसमें सीखने वाला, पाठ्यक्रम और शिक्षण के उद्देश्य सम्मिलित हैं।
12. यह खुले तौर पर अवलोकित किया जाता है कि मापन की तुलना में मूल्यांकन शामिल होता है।
13. अपने मूल्य की निष्पक्ष प्रशंसा की अभिवृत्ति एक मानसिक माप के विचार से पाई जा सकती है।
14. वे सभी क्रियाकलाप जो शिक्षक व शिक्षार्थी द्वारा स्वयं को आकलित करने के लिये किये जाते हैं, जो एक प्रतिपुष्टि के रूप में शिक्षण व अधिगम क्रियाकलापों को सुधारने हेतु सूचना प्रदान करते हैं, उसे आकलन कहा जाता है।
15. व्यक्तिगत भिन्नताओं के मापन की सर्वोत्तम मापनी अन्तराल मापनी है।
16. विद्यार्थी और शिक्षक के बीच की एक संवादात्मक प्रक्रिया जो उनके सीखने के वातावरण में बदलाव लाती है, वह मूल्यांकन और आकलन है।
17. मूल्यांकन को सूचित करना चाहिए कि विद्यार्थी क्या और कैसे सीख रहा है का विस्तृत ब्यौरा।
18. बच्चों का मूल्यांकन गतिक होना चाहिए- उन कौशलों की पहचान करने के लिए जो बच्चे में मौजूद हैं और सीखने के वह कौशल जिनकी उसमें क्षमता है।
19. मूल्यांकन का केंद्र अधिगमकर्ता क्या और कैसे सीख रहा है, इसका वर्णन करना होना चाहिए।
20. मूल्यांकन प्रक्रिया के मुख्य पद शैक्षिक उद्देश्य, सीखने के अनुभव और व्यावहारात्मक परिवर्तन हैं।
21. मूल्यांकन को उपयोगी और रोचक विधि बनाने के लिए छात्र के सीखने की शैक्षिक और सह-शैक्षिक सीमाओं के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के तरीकों की भिन्न किस्म का उपयोग करने के सम्बन्ध में सावधानी बरतनी होगी।
22. प्रभावी शिक्षण के लिए कार्यक्रम को व्यवस्थित करने का अंतिम कदम मूल्यांकन है।
23. आकलन का प्राथमिक उद्देश्य संबंधित अवधारणाओं के बारे में बच्चों की स्पष्टता तथा भ्रांतियों को समझना होना चाहिए।
24. आकलन सभी क्रियाकलापों का एकीकृत भाग होना चाहिए।
25. विज्ञान में अधिगम की उपलब्धि का सफल अभ्यास एक वास्तविक परीक्षण है।
26. मूल्यांकन का उद्देश्य बच्चे को उत्तीर्ण/अनुत्तीर्ण घोषित करना, बच्चा क्या सीखा है जानना और बच्चे के सीखने में आई कठिनाइयों को जानना है।
27. मूल्यांकन का उद्देश्य उस सीमा तक प्रतिपुष्टि प्रदान करना है जहाँ तक हम उत्पादनशील जीवन के लिए शिक्षा प्रदान करने में सफल रहे हैं।
28. मूल्यांकन से बच्चों के सीखने के स्तर का ज्ञान होता है।
29. आकलन उद्देश्यपूर्ण होता है यदि इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को प्रतिपुष्टि (फीडबैक) प्राप्त हो।
30. अधिगम में आकलन प्रेरणा के लिए आवश्यक होता है।
31. आकलन करने का सर्वाधिक उपयुक्त तरीका यह है कि आकलन शिक्षण-अधिगम में अन्तर्निहित प्रक्रिया है।
32. शैक्षिक विकास में मूल्यांकन का अर्थ छात्रों की प्रगति का आकलन है।
33. आकलन शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का अभिन्न अंग है क्योंकि आकलन से अध्यापक बच्चों के अधिगम को समझता है और उससे अपने शिक्षण की प्रतिपुष्टि भी करता है।
34. वह ब्लूम जो पुनर्संशोधित वर्गीकरण में मूल्यांकन (evaluating) के क्षेत्र को प्रदर्शित करता है- एक समाधान की तार्किक सुसंगतता का परीक्षण करना।
35. योगात्मक मूल्यांकन का तात्पर्य शिक्षा वर्ष समाप्ति में सफलता का स्तर मूल्यांकन करना है।
36. किसी शिक्षक के सीखने का मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक बच्चे के कार्य का विश्लेषण करना और उनके अवबोध में अंतर ज्ञात करना चाहिए।
37. अर्जित ज्ञान का परीक्षण करने के लिए विधि आकलन विधि है।
38. अधिगम के आकलन को उजागर करता है कि शिक्षक विद्यार्थियों की चिंतन प्रक्रियाओं पर ध्यान देने के अलावा उनकी अवधारणात्मक समझ का भी आकलन करता है।
39. क्रिस्टीना अपनी कक्षा को क्षेत्र-भ्रमण पर ले जाती है और वापस आने पर अपने विद्यार्थियों के साथ भ्रमण पर चर्चा करती है। यह सीखने का आकलन (Assessment) संकेत करता है।
40. बेंचमार्क आकलन को अंतरिम आकलन भी कहा जाता है।
41. टोरेन्स वह पहला व्यक्ति था जिसने इस बात पर जोर दिया कि रचनात्मकता को उसके तत्वों को मापकर मापा जाना चाहिए।
42. निर्माणात्मक आकलन का प्रयोग मुख्यतः शिक्षकों को बेहतर योजना बनाने एवं विद्यार्थियों को सहयोगात्मक और गैर-मूल्यांकित प्रतिपुष्टि देने के लिए किया जाता है।
43. एक शिक्षक एक महीने की अवधि के अंतराल में विद्यार्थियों को निबंध लेखन के लिए कई ड्राफ्ट लिखने के लिए सहयोग देता है। यदि यह शिक्षक प्रत्येक विद्यार्थी के सभी ड्राफ्ट को ध्यान में रखता है और उन सभी ड्राफ्ट पर काम करने की प्रक्रिया को भी मान्यता देता है, तो इस प्रकार के मूल्यांकन को रचनात्मक कहेंगे।
44. कक्षा नायक (उपदेशक) द्वारा प्रयुक्त मूल्यांकन का प्रकार जो अनुदेशन के समय सीखने के विकास में किया जाता है, फॉर्मेटिव मूल्यांकन कहलाता है।
45. निर्माणात्मक मूल्यांकन का उद्देश्य प्रगति पर गौर करना एवं उपचारात्मक अनुदेशन की योजना बनाना है।
46. जब एक बावर्ची खाना पकाते समय खाने को चखता है तो वह सीखने के लिए आकलन के समान है।
47. सीखने के लिए आकलन अभिप्रेरणा को बढ़ावा देता है।
48. एक शिक्षक कक्षा के कार्य को एकत्र करता है और उन्हें पढ़ता है, उसके बाद योजना बनाता है और अपने अगले पाठ को शिक्षार्थियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए समायोजित करता है। वह सीखने के लिए आकलन कर रहा/रही है।
49. शिक्षण में अध्यापकों के द्वारा विद्यार्थियों का आकलन शिक्षार्थियों की आवश्यकता के अनुसार शिक्षण उपागम में परिवर्तन करने की अन्तर्दृष्टि को विकसित करने के लिए किया जा सकता है।
50. छात्रों के अधिगम के परिणाम के विषय में आकलन को उपचारात्मक मूल्यांकन के रूप में जाना जाता है।
51. अधिगम के लिए एक प्रारंभिक आकलन का प्राथमिक ध्येय अधिगम में अंतराल को समझना होना चाहिए।
52. राउंड रोबिन चार्ट रचनात्मक आकलन के रूप में प्रयुक्त किए जाते हैं।
53. अधिगम के लिए आकलन में कुछ मानदंडों के अनुसार सफलता के विभिन्न स्तरों पर उदाहरण को साझा करना शामिल है।
54. शिक्षकों को बच्चों के मूल्यांकन का विवरण उनके अभिभावकों को देना चाहिए जिससे अभिभावकों की अपने बच्चे के सीखने (क्या और कैसे) के बारे में समझ बन सके।
55. अल्प अवधि मूल्यांकन के फायदे यह हैं कि यह अध्ययन के लिए बहुत समय प्रदान करता है।
56. विद्यार्थी द्वारा प्रत्येक इकाई की समाप्ति पर मानदण्ड संदर्भित ऐसे परीक्षण जिसमें विविध प्रकार की मूल्यांकन तकनीकी के द्वारा लिए गए परीक्षण में प्रदर्शन किया जाता है, यह मूल्यांकन नियतकालिक मूल्यांकन कहलाता है।
57. पाठशाला आधारित मूल्यांकन की विशेषता एक ही समय में सभी के लिये एक ही कार्य का समायोजन है।
58. अधिगमकर्ताओं की उपलब्धि का आकलन शिक्षकों की शिक्षण-अधिगम विधियों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने में सहायता करता है।
59. विद्यार्थियों की उपलब्धि का मूल्यांकन करने के लिए शालाओं में उपयोग में आने वाली विधियाँ परिमाणात्मक एवं गुणात्मक विधि हैं।
60. विद्यालय आधारित आकलन मुख्य रूप से इस सिद्धांत पर आधारित होता है कि बाह्य परीक्षकों की अपेक्षा शिक्षक अपने शिक्षार्थियों की क्षमताओं को बेहतर जानते हैं।
61. विद्यालय आधारित आकलन रचनात्मक प्रतिपुष्टि उपलब्ध कराते हुए सीखने में संवर्द्धन करता है।
62. वे शिक्षक जो विद्यालय आधारित आकलन के अंतर्गत कार्य करते हैं, व्यवस्था के लिए स्वामित्व की भावना रखते हैं।
63. विद्यालय आधारित आकलन परिचित वातावरण में अधिक सीखने में सभी शिक्षार्थियों की मदद करता है।
64. गत्यात्मक मूल्यांकन बच्चे की विशिष्ट अधिगम आवश्यकताएँ समझने में मदद करता है।
65. समग्र मूल्याकंन के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए अध्यापक को विद्यार्थियों के लिए सीखने से प्राप्त उत्पाद और प्रक्रिया पर विचार करना चाहिए।
66. विभिन्न योग्यताओं एवं रुचियों वाले विद्यार्थियों हेतु सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन अधिक उपयोगी होगा।
67. एक अध्यापिका पूरे वर्ष के दौरान अधिगम सम्बन्धी गतिविधियों में संलग्न बच्चों का बारीकी से अवलोकन करती है, उनके कामों के नमूनों का संकलन करती है और प्रत्येक बच्चे के लिए अवलोकन डायरी भी रखती है। इस प्रकार का मूल्यांकन सतत् एवं समग्र कहलाता है।
68. छात्रों की उपलब्धि का मूल्यांकन करने के लिये सबसे अच्छा तरीका सतत् मूल्यांकन है।
69. बच्चों के निष्पादन को प्रभावित करने वाला पाठशाला से सम्बन्धित सबसे प्रमुख कारक सतत् मूल्यांकन है।
70. विद्यालय आधारित सतत् और व्यापक मूल्यांकन छात्रों के लिये तनाव कम करने के लिये, मूल्यांकन को नियमित करने के लिये और अपने कार्य को जाँचने के लिये उपयोगी है।
71. सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन में व्यापक शब्द का अभिप्राय संज्ञानात्मक और सह-संज्ञानात्मक है।
72. किसी बच्चे का विद्यालय के मैदान में खेलते हुए निरीक्षण करना अनौपचारिक निरीक्षण है।
73. सतत् एवं समग्र मूल्यांकन में विविध प्रकार की रणनीतियों का प्रयोग करते हुए दोनों संरचनात्मक एवं संकलनात्मक आकलन का प्रयोग करना शामिल है।
74. अधिकतर बच्चों ने अंग्रेजी के परीक्षण में कम ग्रेड हासिल किए, अध्यापक उनके कम ग्रेड के लिए निदानात्मक मूल्यांकन करेगा।
75. CCE में, औपचारिक और योग्यात्मक निर्धारण का कुल मूल्य क्रमशः 40% और 60% होता है।
76. परीक्षा के स्थान पर सतत् और व्यापक मूल्यांकन गुणवत्ता मूलक शिक्षा के लिए अधिक उपयुक्त है, क्योंकि इसमें संज्ञानात्मक क्षेत्र, सहसंज्ञानात्मक क्षेत्र और सतत् एवं व्यापक क्षेत्रों का मूल्यांकन होता है।
77. सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन से तात्पर्य सीखने की प्रक्रिया के दौरान शैक्षिक एवं सह-शैक्षिक क्षेत्रों को नियमित रूप से आकलित करना है।
78. बच्चों को सीखने-सिखाने की प्रक्रिया के दौरान, वे उस कार्य को किस प्रकार से कर रहे हैं, इसकी जानकारी इन्हें कार्य करते समय सतत् रूप से दी जानी चाहिए।
79. सतत् और व्यापक मूल्यांकन सीखने को किस प्रकार अवलोकित, रिकॉर्ड और सुधारा जाए पर बल देता है।
80. आकलन को उपयोगी और रोचक प्रक्रिया बनाने के लिए शैक्षिक और सह-शैक्षिक क्षेत्रों में विद्यार्थी के सीखने के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए विविध तरीकों के प्रयोग के प्रति सचेत होना चाहिए।
81. मूल्यांकन के कौशल का परीक्षण यह प्रश्न करता है- आज आप जो पुस्तकें पढ़ते हैं वे ऋग्वेद से किस प्रकार भिन्न हैं।
82. परीक्षा में विद्यार्थियों से समझ एवं अनुप्रयोग आधारित प्रकार के प्रश्न पूछने चाहिए।
83. बहुविकल्पी प्रश्न बच्चों की सही उत्तर की पहचान करने की योग्यता का आकलन करते हैं।
84. सत्य या असत्य प्रकार के प्रश्नों को वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की श्रेणी में रखा जाता है।
85. विद्यार्थियों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने का आदर्श प्रतीक्षा समय प्रश्न का कठिनाई स्तर के सही अनुपात में होना चाहिए।
86. सृजनात्मक उत्तरों के लिए मुक्त-उत्तर वाले प्रश्न आवश्यक हैं।
87. प्रयोग में अन्य चरों का मूल्य शून्य अथवा स्थिर करना वस्तुनिष्ठता कहलाता है।
88. वस्तुनिष्ठ प्रकार के परीक्षणों में विद्यार्थी पूर्ण रूप से विषय वस्तु का अध्ययन करते हैं।
89. दबाव को कम करने एवं परीक्षाओं में सफलता के लिए कम अवधि की परीक्षाओं में अंतरण आवश्यक है।
90. जैक गणित में एक कमजोर छात्र है। यह कथन उपलब्धि परीक्षण को सर्वोत्तम समर्थन करता है।
91. वर्तमान परीक्षा प्रणाली मुख्य रूप से ज्ञानात्मक पक्ष के उद्देश्यों का मापन करती है।
92. अधिगम सम्बन्धी कठिनाइयों और कमियों के स्वरूप का निर्धारण निदानात्मक परीक्षण से होता है।
93. वे बच्चे जो मूत्र विसर्जन के प्रति संवेदनशील होते हैं, वे अवलोकन में आसान हैं।
94. प्रमापीकृत परीक्षण प्रतिभाशाली बालकों की पहचान के लिए कराए जाते हैं।
95. एक प्रमाणीकृत पठन परीक्षण लेने के लिए पाँचवीं कक्षा को प्रस्तुत करने में शिक्षक को अधिकाधिक परामर्श दिया जाता है कि परीक्षण में आने वाले समान प्रकार के प्रश्नों के उत्तर देने के लिए छात्रों को अभ्यास कराना।
96. मानकीकृत परीक्षणों की आलोचनाओं में से एक यह है कि वे मुख्य रूप से मुख्यधारा की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं और इसलिए पक्षपाती हैं।
97. मानदंड-संदर्भित आकलन मूल्यांकन पूर्व निर्धारित मानकों के एक निश्चित सेट के विरुद्ध छात्र के प्रदर्शन को मापता है।
98. परीक्षण की विश्वसनीयता का संदर्भ दो भिन्न अवसरों पर एक ही परीक्षण पर किसी व्यक्ति द्वारा प्राप्त लब्धांकों की संगति से है।
99. यदि उन्हीं छात्रों को वही परिणाम लगातार प्राप्त होता है तो यह एक विश्वसनीय आकलन है।
100. एक परीक्षण तैयार करने के बाद, एक शिक्षक प्राप्तांकों की निरन्तरता को जाँचने के लिये एक ही आयु वर्ग के बच्चों पर प्रशासित करता है। वह विश्वसनीयता को जाँचना चाह रहा है।
101. अभिक्षमता एक उत्तम परीक्षण की विशेषताओं से भिन्न है।
102. कोई परीक्षण जो वास्तविक में मापन करता है जिसे मापने के लिए वह बना है, परीक्षण की वैधता कहलाता है।
103. एक शिक्षक प्रश्न-पत्र बनाने के बाद, यह जाँच करता है कि क्या प्रश्न परीक्षण के विशिष्ट उद्देश्यों की परीक्षा ले रहे हैं। वह मुख्य रूप से प्रश्न-पत्र की वैधता के बारे में चिंतित है।
104. वैधता लक्षण किसी मापक उपकरण के लिए सर्वाधिक वांछनीय है।
105. परीक्षण निर्माण का महत्वपूर्ण घटक ब्लू प्रिंट है।
106. वह विधि जिसमें परीक्षणकर्त्ता व्यक्ति से वार्तालाप करके सूचनाएँ एकत्रित करता है- साक्षात्कार।
107. शिक्षक की प्रभाविकता को बढ़ाने के लिए पारस्परिक विश्लेषण पद्धति शिक्षा फ्लैण्डर ने विकसित की।
108. विभेदकारी परीक्षण कमजोर विद्यार्थियों, सामान्य विद्यार्थियों और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों में अन्तर करता है।
109. केवल कागज-पेंसिल जाँचो द्वारा आकलन, आकलन को सीमित कर देता है।
110. शिक्षार्थियों का आत्म-नियम अपने सीखने का स्वयं पर्यवेक्षण करने की उनकी योग्यता की ओर संकेत करता है।
111. समाजमिति तकनीक का प्रयोग समाजीकरण की जाँच में किया जाता है।
112. बच्चों द्वारा पूरे वर्ष के दौरान किए गए विभिन्न कार्यों का संग्रहण, जिसका लक्ष्य उनके प्रदर्शन का रिकॉर्ड रखना है, पोर्टफोलियो कहलाता है।
113. कक्षा में शिक्षार्थियों से कहा गया है कि वे अपने समाज के लिए क्या कर सकते हैं इसे दर्शाने के लिए एक नोटबुक में अपने कार्य को विविध शिल्पकृतियों को संयोजित करें। यह गतिविधि पोर्टफोलियों आकलन है।
114. शिक्षा में अवधारणा मानचित्रण जॉसेफ डी. नोवाक के द्वारा सुझावित किया गया।
115. छात्र की प्रयोगात्मक दक्षता के आकलन का यथोचित् रूप अवलोकन है।
116. विद्यार्थियों के पोर्टफोलियों के लिए सामग्री का चयन करते समय विद्यार्थियों का समावेशन जरूर होना चाहिए।
117. घटना/वृत्तांत रिकॉर्ड की विशेषता यह है कि यह व्यवहार का व्यक्तिनिष्ठ साक्ष्य है और इसलिए यह शैक्षणिक क्षेत्र के लिए प्रतिपुष्टि (फीडबैक) उपलब्ध नहीं कराता।
118. ग्रेडिंग, कोडिंग, अंकन और क्रेडिट संचय प्रणालियाँ अधिगमकर्ताओं की उपलब्धि के आकलन की गणन-विधि के कुछ उदाहरण हैं।
119. ग्रेड अंकों से कैसे अलग है? यह प्रश्न विश्लेषणात्मक संबंध रखता है।