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Topic: संज्ञान, संवेग, संवेदनाएं, प्रत्यक्षीकरण
(By- Tez Education)
1. भावनाएँ और संज्ञान आपस में एक-दूसरे पर पारस्परिक रूप से निर्भर करते हैं, यह संज्ञान और भावनाओं के बीच के संबंध को उपयुक्त रूप से परिभाषित करता है।
2. संज्ञान का कारक स्थान छोड़ना को नहीं माना जाता है।
3. भाव को एक भावना से नियंत्रित किया जाता है और भावनाओं को भाव से व्यवस्थित किया जाता है, भावना भावनाओं का मुख्य आधार है; यह व्यक्ति की भावना और भाव के बारे में सही कथन है।
4. प्रत्येक संवेग के साथ एक भावना निहित रहती है, इससे संवेग की प्रकृति सही रूप में प्रकट होती है।
5. उत्तेजना या भावों में परिवर्तन ही ‘संवेग’ है।
6. व्यवहार का ‘संवेगात्मक’ पहलू सीखने के भावात्मक पक्ष से सम्बन्धित होता है।
7. संतुलित छात्र कक्षा-कक्ष में अपने सहपाठियों से मैत्रीपूर्ण सहसम्बन्ध रखता है।
8. हमउम्र साथियों के साथ प्रतियोगिता पर दृढ़तापूर्वक ध्यान केंद्रित करने के अतिरिक्त सभी तथ्य संकेत करते हैं कि बच्चा कक्षा में संवेगात्मक और सामाजिक परिपक्वता की ओर जा रहा है।
9. संवेग के मनोविज्ञान में इस तथ्य पर सबसे कम ध्यान दिया गया है कि संवेग न केवल वैयक्तिक शिक्षार्थियों में बल्कि पूरी कक्षा में भी उत्पन्न होते हैं।
10. गोलमैन संवेगात्मक बुद्धि से सम्बन्धित हैं।
11. संवेग की उत्पत्ति मूल प्रवृत्तियों से होती है।
12. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार मार्गान्तरीकरण विधि द्वारा मूल-प्रवृत्तियों में परिवर्तन लाया जा सकता है।
13. समानुभूति देना कौशल संवेगात्मक बुद्धि से सम्बन्धित है।
14. एक शिक्षिका का भावानात्मक बुद्धिलब्धांक ऊंचा है, इसका तात्पर्य है कि वह संतुलित व्यवहार वाली है।
15. भय संवेग उत्पन्न करने के लिए स्वाभाविक उद्दीपक अचानक उत्पन्न होने वाला उद्दीपक है।
16. तीन माह की अवस्था के प्रारम्भिक संवेग प्रसन्नता, उदासी, घृणा हैं।
17. प्राथमिक संवेग आश्चर्य, भय, गुस्सा हैं।
18. स्मृति एक संवेग है।
19. आमोद एक संवेग है।
20. मैक्डूगल के अनुसार मूल प्रवृत्ति ‘जिज्ञासा’ का सम्बद्ध संवेग आश्चर्य है।
21. मूल प्रवृत्तियों को चौदह प्रकार से मैक्डूगल ने वर्गीकृत किया है।
22. क्रोध व भय संवेग के प्रकार हैं।
23. मूल प्रवृत्ति की एक प्रमुख विशेषता है कि यह सभी प्राणियों में पायी जाती है तथा यह जन्मजात व प्राकृतिक होती है।
24. मैक्डूगल के अनुसार प्रत्येक मूल प्रवृत्ति से संवेग सम्बद्ध होता है।
25. स्पीनोजा ने संवेग को 3 प्रकार से बाँटा है।
26. सहानुभूति कौशल में व्यक्ति दूसरों की परेशानियों को समझता है।
27. रॉस ने संवेग को 3 प्रकार से बाँटा है।
28. जेम्स लैंग सिद्धांत यह मानता है कि ‘संवेगात्मक अनुभव संवेगात्मक व्यवहार’ पर आधारित हैं।
29. माँ और उसके बच्चे के बीच मजबूत बंधन का वर्णन करने के लिए ममता (अटैचमेंट) शब्द का उपयोग किया जाता है।
30. जब बच्चे की दादी उसे उसकी माँ की गोद से लेती है, तो बच्चा संवेगात्मक दुश्चिंता के कारण रोने लगता है।
31. आकलन प्रक्रिया के दौरान देविका की उत्तेजना ऊर्जापूर्ण होती है जबकि राजेश की उत्तेजना ऊनुत्साही; उन दोनों के भावात्मक अनुभवों का अन्तर अनुकूलन का स्तर से सम्बद्ध है।
32. सी.बी.एस.ई. द्वारा सामूहिक गतिविधियों की संस्तुति करने के पीछे व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा के प्रति नकारात्मक संवेगात्मक प्रतिक्रियाओं से उबारना विचार हो सकता है जो संपूर्ण अधिगम पर सामान्यीकृत हो सकती है।
33. बच्चों के संवेगों की अधिगम में भूमिका यह है कि संवेग सीखने की प्रक्रिया को अर्थपूर्ण बनाते हैं तथा उन्हें सीखने की प्रक्रिया में एकीकृत रूप से सम्मलित करना चाहिए।
34. जिज्ञासा संवेग अर्थपूर्ण सीखने को प्रोत्साहित करेगा।
35. परीक्षा के शुरू होने से पहले तन्वी गहरे-लंबे श्वास भरती है, वह दुश्चिन्ता से निपटने के लिए भाव नियमन तकनीक का इस्तेमाल कर रही है।
36. जब एक विद्यार्थी किसी क्रियाकलाप के नकारात्मक परिणाम, मूल्य और नियंत्रण की कमी पर केन्द्रित रहता है, तब उसे दुश्चिंता भाव का अहसास होगा।
37. एक ऐसी स्थिति में जहां परिणाम अनिश्चित हो, लेकिन ध्यान असफलता पर हो, तब बच्चे को दुश्चिंता का भाव महसूस होगा।
38. संप्रत्यात्मक समझ को सुसाध्य करने के लिए एक शिक्षिका को केवल जानकारी के पुनरुत्पादन पर बल नहीं देना चाहिए।
39. मान/गर्व संवेग विद्यार्थियों को सीखने के लिए प्रयत्न करने पर बल देगा।
40. बोरियत संवेग विद्यार्थियों को अधिगम में हतोत्साहित करेगा।
41. जब एक विद्यार्थी को गर्व का अहसास होगा यदि वह सफलता का आरोपण आंतरिक मानता है और क्रोध का अहसास होगा यदि वह असफलता का आरोपण बाह्य मानता है।
42. अधिगम की प्रक्रिया में शर्मिंदगी हानिकारक है।
43. निराशा संवेग अधिगम को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
44. संज्ञान एवं संवेग के बीच संबंध द्विदिशीय होता है – दोनों के बीच एक गतिशील पारस्पारिक क्रिया होती है।
45. संवेग एवं संज्ञान एक दूसरे से सन्निहित हैं।
46. आशा संवेग अधिगम को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
47. पीटर कहता है कि “मैं असफल हूँ क्योंकि मैं मूर्ख हूँ और हमेशा ही असफल होऊँगा”, यह सीखी गई निःसहायता (बेचारगी) को दर्शाता है।
48. गतिविधि को महत्व न दिए जाने पर विद्यार्थियों को बोरियत महसूस होने की संभावना है।
49. एक शिक्षक को अपने शिक्षार्थियों में जुड़ाव की भावना पैदा करनी चाहिए।
50. संवेगों से संबंधित समकालीन मनोवैज्ञानिक सिद्धांत संज्ञानात्मक और भावनात्मक प्रक्रियाओं के सम्बन्ध को इस तरह देखते हैं कि दोनों एक दूसरे से गुंथे हुए हैं।
51. चर्चा और संवाद विद्यार्थियों के बीच कार्य की संरचनात्मक समझ को सुसाध्य करने में सहायक है।
52. अधिगम और सूचना प्रसंस्करण, संवेगों से काफी हद तक प्रभावित होते हैं।
53. सफलता का कारण स्वयं को माना जाना विद्यार्थियों में गर्व का कारण बन सकती है।
54. छात्रों में भय का भाव अधिगम के लिए हानिकारक है।
55. कोविड-19 महामारी के दौरान तनाव ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है, यह संज्ञान और संवेग के संबंध को स्पष्ट करता है।
56. शिक्षकों का गैर-मित्रता पूर्ण वर्ताव भय और विस्मय का वातावरण तैयार कर सकता है।
57. भावनात्मक और अनुभूति एक दूसरे के आंतरिक जुड़े हुये हैं।
58. शिशु के प्रति सहानुभूति एवं प्यार दुलार से अनुराग संवेग की उत्पत्ति होती है।
59. जजोंक का यह मानना है कि संज्ञान और भाव स्वतंत्र होते हैं।
60. अधिगमकर्ता में बढ़ते हुए क्रोध को रोकने के लिए अध्यापक को चाहिए कि बालक के दिन-प्रतिदिन के मामलों में कोई हस्तक्षेप न करे।
61. परीक्षा में तनाव-निष्पत्ति को प्रभावित करता है, यह तथ्य संज्ञान-भावना के सम्बन्ध को स्पष्ट करता है।
62. बच्चों में संवेगात्मक समायोजन व्यक्तित्व निर्माण में, कक्षा शिक्षण में और अनुशासन में प्रभावी होता है।
63. संवेदना के माध्यम से विशिष्ट उद्दीपन का चयन करने का अभिलक्षण बोध है।
64. छात्र पढ़ रहा है और उसका नाम लेकर बुलाया गया, वह ध्वनि संवेदना द्वारा अपनी अनुक्रिया प्रकट करेगा।
65. पूर्व अनुभव के आधार पर संवेदना को अर्थ प्रदान करना प्रत्यक्षीकरण कहलाता है।
66. अर्थपूर्ण संवेदना प्रत्यक्षीकरण है।