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Topic:- भाषा एवं विचार
(By- Tez Education)
1. विभिन्न भाषाई पहचान वाले शिक्षार्थियों वाली कक्षा में, एक शिक्षक को अभ्यास कराना चाहिए- बहुभाषावाद
2. भाषा व संज्ञानात्मक विकास के बारे में सही कथन है- भाषा की संज्ञानात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है
3. बच्चों के भाषाई विकास के लिए जरूरी है कि उनको अधिक-से-अधिक अपने विचार व्यक्त करने के अवसर देने चाहिए, भाषायी कौशलों के विकास हेतु गतिविधियाँ आयोजित की जानी चाहिए, लिखना, पढ़ना, बोलना तथा सुनने का अभ्यास करना चाहिए
4. भाषा में अर्थ के अध्ययन को और भी जिस नाम से जाना जाता है- सिमेंटिक्स
5. दूसरे वर्ष में अन्त तक शिशु का शब्द भण्डार हो जाता है- 100 शब्द
6. वह उम्र जब बालक हिन्दी अक्षरों को पहचानने लगता है- 5 वर्ष की आयु में
7. एक भाषा को सीखने में दक्षता प्राप्त होती है- सुनने के साथ
8. कक्षा एक में बच्चों की भाषा कौशल का विकास क्रम में होना चाहिए- सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना
9. भाषा शिक्षण की प्रथम कक्षा माना जाता है- घर को
10. अधिकांश बालक अपनी मातृभाषा सीख लेते हैं- छः वर्ष की आयु में
11. सामान्य बुद्धि बालक प्रायः बोलना सीख जाते हैं- 11 माह
12. भाषा विकास के लिए सबसे संवेदनशील समय है- प्रारंभिक बचपन का समय
13. भाषा के अर्जन एवं विकास के लिए सर्वाधिक संवेदनशील अवधि है- प्रारंभिक बाल्यावस्था
14. भाषा के विकास के लिए प्रारम्भिक बचपन अतिसंवेदनशील काल है
15. भाषा में मुख्य रूप से कुल कौशल हैं- 4
16. पठन कौशल को इस प्रक्रिया द्वारा सबसे अच्छी तरह विकसित किया जा सकता है- पाठ में शब्दों के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करना
17. भाषा, विषय-वस्तु है- सांकेतिक
18. वह उम्र जब बच्चा भाषा की समझ दिखाना शुरू कर देता है- छः महीने पर
19. भाषा के उद्गमन के दौरान, “शब्दजाल या जार्गन” अवधि इस दौरान होती है- छः से नौ महीने
20. 18 से 24 महीनों की आयु के बीच अधिकांश बच्चे शब्दों को मिलाकर छोटे-छोटे वाक्यों में बोलना शुरू कर देते हैं
21. विकास का वह आयाम जो नॉम चॉमस्की के सिद्धांतों से प्रभावित हुआ है- भाषा विकास
22. मध्य बाल्यावस्था में भाषा समाजीकृत के बजाय अहंकेद्रित अधिक है
23. चॉम्स्की के अनुसार, भाषा अर्जित करने की एक अंतर्जात क्षमता जो मानव को जैविक वंशागति के फलस्वरूप प्राप्त हमारी अद्वितीय क्षमता है, को कहते हैं- भाषा अर्जन साधन
24. भाषा रूपांतरण सिद्धान्त दिया था- चॉमस्की
25. चॉमस्की के अनुसार, मानव में भाषा विकसित करने की जैविक पूर्व प्रवृत्ति है
26. “विचार पहले आते हैं फिर भाषा” भाषा विकास के सम्बन्ध में यह कथन था- जीन पियाजे
27. भाषा और संज्ञान के बारे में वायगोत्सकी प्ररिप्रेक्ष्य से सम्बन्धित कथन है- उच्च मानसिक क्रियाओं के विकास को भाषा सुसाधित करती है
28. बी.एफ. स्किनर के अनुसार बच्चों में भाषायी विकास अनुकरण एवं पुनर्बलन का परिणाम है
29. व्यक्ति अपनी अनुभूतियों को व्यक्त करता है, वह विशिष्ट तरीका है- आत्म प्रबलन
30. भाषा-विकास के संदर्भ में वह क्षेत्र जो पियाजे के द्वारा कम कर आंका गया- सामाजिक अंतःक्रिया
31. ‘महत्वपूर्ण अवधि की परिकल्पना’ एरिक लेनबर्ग के द्वारा प्रस्तावित की गई थी
32. बच्चों में भाषा का विकास इस सिद्धांत के अंतर्गत होता है- एक रूप पैटर्न
33. एक विद्यार्थी कहता है, “उसका दादा आया है”। एक शिक्षक होने के नाते आपकी प्रतिक्रिया होनी चाहिए- अच्छा, आपके दादाजी आए हैं
34. धीमी या तेज गति से बोलना वाणी दोष नहीं है
35. अनुकरण की प्रक्रिया में सर्वप्रथम शिशु अनुकरण करता है- शब्दों का
36. 3 वर्ष की आयु में बालक लगभग 1000 शब्द सीख लेता है
37. किसी भी नयी भाषा को सीखने के लिए, प्रारम्भ किया जाना चाहिए- अक्षरों व शब्दों के मध्य साहचर्य से
38. सम्भाषण में अर्थ की लघुतम इकाई है- रूपग्राम
39. भाषा का वह घटक जो ध्वनि के अनुक्रम संचालन एवं उसकी संरचना से सम्बन्धित नियम की चर्चा करता है, उसे कहते हैं- स्वर विज्ञान
40. किसी भाषा के स्वीकृत ध्वनि संयोजनों को इसके ध्वनि-संबंधी नियमों के अन्तर्गत बनाया जाता है
41. ‘बोली जाने वाली भाषा’ की सबसे छोटी इकाई है- ध्वनिग्राम
42. थ, फ, च ध्वनियाँ हैं- स्वनिम
43. ‘मैडम चाय खाती हैं’ वाक्य- वाक्य-विन्यास की दृष्टि से सही है लेकिन अर्थ-विज्ञान की दृष्टि से गलत है
44. किसी भाषा में, अर्थ को दर्शाने वाली सबसे छोटी इकाई को कहा जाता है- रूपिम (मॉर्फीम)
45. भाषा के विकास में, एक वाक्य के संरचनात्मक संगठन को वाक्यविन्यास (सिंटेक्स) के रूप में जाना जाता है
46. भाषा हमारी विचार-प्रक्रिया को प्रभावित करती है
47. सामाजिक-रचनात्मक दृष्टिकोण के अनुसार भाषा और विचार के बीच संबंध का सही वर्णन करता है- भाषा और विचार के बीच संबंध द्वि-दिशात्मक है
48. जब सोचने की प्रक्रिया किसी भाषा द्वारा प्रभावित होती है, तो ऐसी स्थिति को कहते हैं- भाषा निर्धारित
49. ‘भाषा सापेक्षतावादी परिकल्पना’ में मजबूत विश्वासियों का तर्क है कि- भाषा विचार को निर्धारित करती है
50. भाषा और विचार स्वतंत्र होते हैं, यह प्रस्तावित किया- चॉमस्की
51. जब कोई व्यक्ति सूचनाओं को संसाधित कर रहा होता है तो मस्तिष्क में चलने वाली मानसिक गतिविधि कहलाती है- विचारण
52. अपने ही चिंतन के बारे में चिंतन करना है- परावर्तित चिंतन
53. वह समस्या जिसके लिए अपसारी चिंतन की आवश्यकता होती है- ताश के पत्ते खेलते समय सबसे बढ़िया-चाल को चुनने के लिए
54. चिंतन अनिवार्य रूप से है एक- संज्ञानात्मक गतिविधि
55. ‘चिंतनशील सोच’ की चर्चा की है- ड्यूवी
56. बालक का चिंतन वैयक्तिकवाद के द्वारा प्रदर्शित नहीं होता
57. मस्तिष्क का वह भाग जो चिंतन के लिए जिम्मेदार है- प्रमस्तिष्क वल्कुट (सेरेब्रल कार्टेक्स)
58. एक बच्ची कहती है, “धूप में कपड़े जल्दी सूख जाते हैं।“ वह कार्य-कारण की समझ को प्रदर्शित कर रही है
59. एक शिक्षिका विद्यार्थियों से उनकी स्वयं की चिंतन प्रतिक्रियाओं के बारे में सोचने के लिए कह रही है। वह विद्यार्थियों के बीच अधि-संज्ञानात्मक कौशल विकसित करने पर ध्यान केन्द्रित कर रही है
60. विशिष्ट जानकारी के स्मरण पर आधारित प्रश्न का उत्तर देने के बाद एक विद्यार्थी इस बात पर विचार कर रहा है कि इस कार्य में किन संकेतों ने उसकी मदद की। ऐसा करने से विद्यार्थी अधिसंज्ञान का विकास कर रहा है
61. चिंतन में निष्कर्ष निकालना, अमूर्त प्रक्रिया, तर्क-वितर्क प्रक्रिया मानसिक प्रक्रिया चलती है
62. चिंतन की प्रक्रिया में सबसे कम महत्वपूर्ण है- मांसपेशीय क्रियाएँ
63. एक विद्यार्थी एक प्रकरण में मुख्य बिन्दुओं को रेखांकित करती है, उसका एक दृश्यात्मक प्रस्तुतीकरण बनाती है तथा प्रकरण की समाप्ति पर अपने दिमाग में उत्पन्न होने वाले प्रश्नों को प्रस्तुत करती है। वह विचारों के संघटन के द्वारा अपने चिंतन को निर्देशित करने की कोशिश कर रही है
64. रचनात्मकता चिन्तन के जिस प्रकार से सम्बन्धित है- अपसारी चिन्तन
65. एक छात्र को पाई के मान का मूल्यांकन करने के लिए विभिन्न प्रणाली को ज्ञात करने के लिए कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से अपसारी चिंतन ऑपरेशन शामिल होगा
66. ‘ऑउट-ऑफ-द-बॉक्स’ चिंतन सम्बन्धित है- अपसारी चिंतन
67. आगामी 10 वर्षों में क्या विज्ञान इतनी उन्नति कर लेगा कि दूसरे ग्रहों पर जीवन की खोज की जा सकेगी? यह प्रश्न विद्यार्थियों में अपसारी चिंतन को बढ़ावा देगा, क्योंकि यह अनेक संभावित उत्तर देने का मौका देता है
68. एक शिक्षक को ऐसी गतिविधियों की रूपरेखा तैयार करनी चाहिए जो अपसारी सोच को बढ़ावा दें
69. रीना कक्षा में दी गई किसी भी समस्या को सुलझाने के लिए अलग-अलग तरकीबों से बारे में सोचती है। यह प्रतीक है- अपसारी सोच
70. वह चिंतन जो योग्यताओं के अंतर्गत सामान्यतया चिंतन प्रवाह, लचीलापन, मौलिकता एवं विस्तारण आते हैं- अपसारी चिंतन
71. जब कोई एक समस्या के एक से अधिक संभाव्य समाधान रहते हैं, और ऐसे ही समस्या का समाधान सृष्टि करने वाला चिंतन को अपसारी चिंतन नाम से जाना जाता है
72. सृजनात्मक चिंतन सदैव होता है- रचनात्मक
73. विभिन्न मुद्दों और विमर्शों पर उनके लिए कारण प्रस्तुत करते हुए बच्चों को अपनी व्यक्तिगत राय को व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करने वाले प्रश्न, बढ़ावा देते है- विश्लेषणात्मक और आलोचनात्मक चिंतन
74. वस्तु एवं पृष्ठभूमि के संबंध के बारे में अधिक सोचने को कहा जाता है- समग्र चिंतन
75. आगमनात्मक तर्कणा सृजनात्मक चिंतक प्रकार के चिंतक द्वारा प्रयोग में लाई जाती है
76. अमन हमेशा समस्या के एकाधिक समाधानों के बारे में सोचता है। इनमें से काफी समाधान मौलिक होते हैं। अमन सृजनात्मक चिंतक प्रदर्शन कर रहा है
77. सृजनात्मक सोच को अभिसारी सोच के द्वारा बढ़ावा नहीं दिया जा सकता
78. विद्यार्थियों में समालोचनात्मक सोच का मूल्याँकन करने का प्रभावी तरीका है- बच्चों को प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित करना और उनके जवाबों का विश्लेषण करना
79. वह प्रक्रिया जो माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों में समालोचनात्मक चिंतन का संवर्धन कर सकती है- विद्यार्थियों को किसी भी विषय पर चर्चा करने के लिए कहना और सवाल पूछना
80. वास्तविक जीवन की समस्याओं पर चर्चा को सुसाध्य करने और विद्यार्थियों का विविध परिप्रेक्ष्यों पर चिंतनशील होने के लिए प्रोत्साहित करने से विद्यार्थी में समालोचनात्मक चिंतन का विकास करने में मदद मिलेगी
81. विद्यार्थियों मे समालोचनात्मक चिंतन का आकलन किया जा सकता है- उनके विवेचनात्मक कौशलों के विश्लेषण द्वारा
82. कक्षा में समालोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने का सही उदाहरण है- अपने शहर में प्रदूषण के विभिन्न कारणों का विश्लेषण कीजिए और प्रदूषण दूर करने के विभिन्न उपाय सोचिए
83. एक नवीन परिस्थिति में दूसरों की तुलना में अधिक अपसारी चिंतन करने वाले व्यक्ति की बुद्धि का वर्गीकरण है- सृजनात्मक बुद्धि
84. समालोचनात्मक चिंतन में शामिल है- परासंज्ञान, विश्लेषण, मनन
85. एक पाँच वर्ष के बालक का चिंतन का प्रकार होता है- निर्देशित चिंतन
86. शब्दों की भाषा कल्पनाशील चिंतन के लिए आवश्यक नहीं है
87. रचनात्मक चिंतन का उदाहरण है- पूछ-ताछ
88. विचारात्मक चिंतन की चर्चा की है- डीवी
89. चिंतन के सूचना प्रक्रमण सिद्धांत में सही चरण आते हैं- पूर्व-प्रक्रमण, श्रेणीकरण, प्रतिक्रिया चयन, प्रतिक्रिया क्रियान्वयन
90. सिद्धान्त चित्र के द्वारा नवीन अवधारणाओं की समझ बढ़ाते हैं- तर्कपूर्ण ढंग से सूचनाओं को व्यवस्थित करने की योग्यता को बढ़ाने
91. अधि-संज्ञानात्मक कौशल का उदाहरण है- किसी समस्या को हल करने में स्वयं द्वारा प्रयुक्त प्रक्रिया का मूल्यांकन करना
92. अपने चिंतन में अवधारणात्मक परिवर्तन लाने हेतु शिक्षार्थियों को सक्षम बनाने के लिये शिक्षिका को- स्पष्ट और आश्वस्त करने वाली व्याख्या देनी चाहिए तथा शिक्षार्थियों के साथ चर्चा करनी चाहिए
93. कक्षा में सहज ज्ञान चिंतन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए- हाँ, बच्चों का सहज ज्ञान और अनुमान, उनके ज्ञानात्मक चिंतन को विकसित करने में सहायता करते हैं
94. वह प्रश्न जो आलोचनात्मक सोच का मूल्यांकन करते हैं- भोजन जिन की कमी के विभिन्न कारण क्या हो सकते हैं
95. विद्यार्थियों की सोच को सुसाध्य करता है- साथियों के साथ चर्चा करना
96. मान लीजिए आप विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष हैं, आप अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विद्यालयों की शिक्षा की संपूर्ण गुणवत्ता को सुधारने के लिए क्या योजना बनाएंगे। इस प्रकार का प्रश्न उच्च स्तरीय अपसारी का एक उदाहरण है
97. जब बच्चे प्राप्त की गई सूचनाओं की व्याख्या करने के लिए अपने अनुभवों के आधार पर सोचते हैं, तो उसे कहा जाता है- मूर्त सोच
98. विद्यार्थियों में संकल्पनात्मक समझ को सुसाध्य करने हेतु, एक अध्यापिका को- जो प्रस्तुत किया गया है और जो पहले से ही ज्ञात है, उन दोनों में संबंध स्थापित करने के अवसर प्रदान करने चाहिए
99. कल्पना के विकास के लिए- ज्ञानेन्द्रियों को प्रशिक्षित करना चाहिए, कहानी सुनना चाहिए, रचनात्मक प्रवृत्ति के विकास पर ध्यान देना चाहिए
100. अपनी कक्षा के बच्चों को उनकी अपनी अवधारणाओं को बदलने में आप सहायता करेंगे- अवधारणाओं के बारे में बच्चों को अपनी समझ को व्यक्त करने का अवसर देकर
101. “सामान्य से विशिष्ट की ओर” प्रकार की तर्कना कहलाती है- निगमनात्मक तर्कना
102. कहावत कि, “अंगूर खट्टे हैं” संबंधित है- प्रतीपायन से
103. किसी संप्रत्यय को पढ़ाने के लिए एक अध्यापिका विभिन्न उदाहरण प्रस्तुत करती है और उसके बाद विद्यार्थियों को उन उदाहरणों द्वारा एकत्रित जानकारी के आधार पर नियम निर्धारित करने को कहती है। इस क्रिया में अध्यापिका किस अधिगम का इस्तेमाल कर रही है- आगमनात्मक
104. संक्षिप्त रूप PSRN जोकि विकास से सम्बन्धित है, व्याख्या करता है- समस्या हल, तार्किकता व आंकिक क्षमता
105. किसी संप्रत्यय तथा उसके उपसंप्रत्यय की अधिक्रम तथा अंतर्संबंधित रूप से प्रस्तुति कहलाती है- चित्रण आयोजक
106. बच्चों में सम्प्रत्यात्मक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए सबसे प्रभावी विधि है- बहुत से उदाहरण व गैर-उदाहरण देना तथा बच्चों को तर्कशक्ति का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना
107. किसी संप्रत्यय को पढ़ाते समय, गैर उदाहरणों का इस्तेमाल उस संप्रत्यय को परिभाषित करने वाले गुणों की स्पष्टता बढ़ाने के लिए करना चाहिए
108. किसी नए संप्रत्यय के अधिगम को सुसाध्य करने के लिए एक अध्यापक को करना चाहिए- नई जानकारी को विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान से जोड़ना चाहिए
109. संप्रत्यात्मक समझ हेतु अध्यापन के लिए, एक अध्यापक को विद्यार्थियों के पूर्व-ज्ञान से संबंध स्थापित करना चाहिए
110. माध्यमिक स्तर पर एक नए संप्रत्यय को पढ़ाते हुए एक अध्यापिका को विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान को नए संप्रत्यय से जोड़ना चाहिए
111. विद्यार्थियों में सम्प्रत्ययात्मक अधिगम हेतु, एक अध्यापिका को विषयों को जटिल से सरल क्रम में लगाने का प्रयोग टालना चाहिए
112. विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक परिवर्तन को प्रोत्साहित करने के लिए एक शिक्षिका को- ऐसी सामग्री देनी चाहिए जो मध्यम रूप से चुनौतीपूर्ण हो और स्कीमा में रूपांतरण की माँग करे
113. एक कक्षा में जल संप्रत्यय पर चर्चा के दौरान एक बच्चा कहता है कि ‘जल रंगहीन नहीं है।‘ अध्यापिका के पूछे जाने पर वह उसके घर के पास वाले नाले के गंदे पानी का संदर्भ देता है। बच्चे के इस भ्रांति पर अध्यापिका की प्रतिक्रिया होनी चाहिए- इस जवाब को अपना लेना चाहिए और जल के रंगहीन होने का तर्क बताना चाहिए
114. एक वैज्ञानिक सम्प्रत्यय पर चर्चा के दौरान, एक शिक्षिका ने पाया कि कुछ विद्यार्थियों को उस संप्रत्यय से सम्बन्धित कुछ भ्रांतियां हैं। ऐसी स्थिति में शिक्षिका को करना चाहिए- विद्यार्थियों को भ्रांतियों के बारे में बात करने दें और वैज्ञानिक तर्क की खोज के अवसर प्रदान करें
115. एक शिक्षक कुछ लिखित सामग्री का एवं सब्जियों और फलों की तस्वीरों का प्रयोग करते हुए अपने छात्रों से चर्चा करता है। विद्यार्थी इस परिचर्चा को अपने पूर्वज्ञान से जोड़ते हुए पोषण का संप्रत्यय सीखते हैं। यह उपागम ज्ञान के निर्माण पर आधारित है
116. एक सम्प्रत्यय को पढ़ाते समय, एक शिक्षक एक ऐसा उदाहरण दे रहा है जिसमें उस सम्प्रत्यय से जुड़ी श्रेणी की सबसे महत्वपूर्ण “मूल” विशेषताएं हैं। ऐसे उदाहरण को कहा जाता है- एक आद्यरूप
117. विद्यार्थियों को नए सम्प्रत्यय पढ़ाते समय शिक्षक को पहले जटिल अवधारणाओं को प्रस्तुत करें और फिर सरल की ओर बढ़ें से बचना चाहिए
118. विद्यार्थियों में प्रत्यय निर्माण के लिए शिक्षक की शिक्षण विधि सरल से जटिल की ओर होनी चाहिए, को विद्यार्थी को व्यापक अनुभव का अवसर प्रदान करना चाहिए, को विद्यार्थी को निर्मित प्रत्ययों के अन्तरण का अवसर देना चाहिए
119. विद्यार्थियों को हाल ही में सीखे गए संप्रत्यय पर विस्तारण में मदद करते समय बोर्ड पर लिखना और विद्यार्थियों से इसे बिना समझे नकल करने के लिए कहना से बचना चाहिए
120. किसी संप्रत्यय के प्रासंगिक और अर्थपूर्ण होने के लिए आवश्यक है- बच्चे के जीवन संबंधित सामाजिक परिप्रेक्ष्य से जोड़ कर पढ़ाना
121. शिक्षक बच्चों की जटिल अवधारणाओं की समझ को जिस प्रकार सहज कर सकते हैं- अन्वेषण एवं परिचर्चा के लिए अवसर उपलब्ध करके
122. विद्यार्थियों को स्पष्ट उदाहरण एवं गैर-उदाहरण देने के परिणाम हैं- अवधारणात्मक परिवर्तनों को प्रोत्साहित करने के लिए यह एक प्रभावशाली तरीका है
123. एक बच्चा खिड़की के सामने से एक कौवे को उड़ता हुआ देखता है और कहता है, “एक पक्षी”। इससे बच्चे के विचार के बारे में पता चलता है- बच्चे की स्मृतियां पहले से भंडारित होती हैं, बच्चे में ‘पक्षी’ का प्रत्यय विकसित हो चुका है
124. प्रत्ययों का बनते रहना एक संचयी प्रक्रिया है
125. संप्रत्यय निर्माण का प्रथम सोपान है- प्रत्यक्षीकरण
126. अवधारणाओं का विकास मुख्य रूप से बौद्धिक विकास का हिस्सा है
127. विद्यार्थियों में संप्रत्ययात्मक विकास को प्रोत्साहन देने के लिए सबसे प्रभावी विधि है- विद्यार्थियों को बहुत-से उदाहरण देना और उन्हें तर्कशक्ति का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना
128. ज्ञान के एक बड़े असम्बद्ध भाग को प्रस्तुत करना- शिक्षार्थियों के लिए अवधारणात्मक समझ को प्राप्त करने को कठिन बनाएगा
129. अनेक घटनाओं के बारे में बच्चों के द्वारा बनाए गए ‘सहजानुभूत सिद्धांतों’ के संदर्भ में एक शिक्षिका को प्रतिकूल प्रमाण एवं उदाहरणों को प्रस्तुत करके बच्चों के इन सिद्धांतों को चुनौती देनी चाहिए
— शिक्षा के प्रति समर्पित: Tez Education —